Varanasi News: उत्तर प्रदेश एटीएस ने रविवार को वाराणसी में बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) के सुप्रीमो बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता उर्फ सरदार को मुठभेड़ में मार गिराया। उस पर झारखंड पुलिस और एनआईए की ओर से कुल 30 लाख रुपए का इनाम घोषित था। करीब 20 वर्षों से फरार बृजेश के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी, आगजनी और पुलिस पर हमले समेत 50 से अधिक मामले दर्ज थे।
उत्तर प्रदेश एटीएस को सूचना मिली थी कि झारखंड का एक कुख्यात नक्सली अपने साथी के साथ उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने वाला है। इसके बाद वाराणसी से सटे मिर्जापुर और सोनभद्र के इलाकों के साथ संभावित रास्तों पर निगरानी बढ़ाई गई। रविवार तड़के सूचना मिली कि बृजेश वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र में लंका मैदान की ओर बढ़ रहा है।
एटीएस की टीम ने जीटी रोड की ओर से मोटरसाइकिल पर आ रहे दो संदिग्धों को रोकने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार, मोटरसाइकिल सवारों ने टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में बृजेश गंझू गोली लगने से घायल हो गया, जबकि उसका साथी मौके से फरार हो गया।
मुठभेड़ के दौरान एटीएस टीम का नेतृत्व कर रहे डिप्टी एसपी विपिन कुमार राय और मुख्य आरक्षी नितेंद्र कृष्ण को भी गोली लगी। हालांकि, दोनों ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थी, जिससे उनकी जान बच गई। घायल बृजेश को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस के मुताबिक, मौके से दो पिस्टल, एक कार्बाइन, कारतूस और करीब एक लाख रुपए नकद बरामद किए गए हैं। डीजीपी राजीव कृष्ण ने मुठभेड़ में शामिल एटीएस टीम के लिए 2 लाख रुपए के पुरस्कार की घोषणा की है।
चतरा में 50 से ज्यादा मुकदमे
बृजेश गंझू मूल रूप से चतरा जिले के लूटू गांव का रहने वाला था। उसके खिलाफ वर्ष 1996 से 2025 तक चतरा के सिमरिया, टंडवा, लावालौंग, मयूरहंड, पत्थलगड्डा, गिद्धौर, पिपरवार और सदर थाना क्षेत्रों में 50 से अधिक मामले दर्ज बताए गए हैं। इनमें हत्या, अपहरण, रंगदारी, लेवी वसूली, पुलिस पर हमला, आगजनी और हथियार रखने के मामले शामिल हैं। कई मामलों में यूएपीए, सीएलए एक्ट और आर्म्स एक्ट की धाराएं भी लगाई गई थीं।
बृजेश पहले सीपीआई (माओवादी) से जुड़ा था। बाद में वह टीएसपीसी में शामिल होकर संगठन का सुप्रीमो बना। पुलिस रिकॉर्ड में उसके कई उपनाम दर्ज हैं। वर्ष 2010 में वह लावालौंग पंचायत से निर्विरोध मुखिया भी चुना गया था। झारखंड सरकार ने उस पर 25 लाख और एनआईए ने 5 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था।


