Patna News: बिहार विधान परिषद के एनेक्सी भवन में बुधवार को आयोजित गरिमामय शपथ ग्रहण समारोह में 10 नवनिर्वाचित सदस्यों ने विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने सभी सदस्यों को शपथ दिलाई। इस अवसर पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जिससे समारोह राजनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम रहा।
शपथ ग्रहण की शुरुआत भोजपुरी फिल्म अभिनेता और नवनिर्वाचित विधान पार्षद पवन सिंह से हुई। उन्होंने सबसे पहले एमएलसी पद की शपथ ली। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, संजय मयूख, सुनील कुमार सिंह सहित अन्य सभी नवनिर्वाचित सदस्यों ने क्रमवार शपथ ग्रहण की। समारोह के दौरान सभी सदस्यों ने संविधान के प्रति निष्ठा और अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के कई वरिष्ठ नेता, मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। समारोह का एक विशेष दृश्य उस समय देखने को मिला जब उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव मंच पर एक-दूसरे के बगल में बैठे नजर आए। राजनीतिक हलकों में इस दृश्य की भी चर्चा रही।
गौरतलब है कि करीब 20 दिन पहले बिहार विधान परिषद की रिक्त सीटों के लिए चुनाव संपन्न हुआ था। इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चार, जनता दल (यूनाइटेड) के चार, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के एक और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के एक उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। निर्विरोध निर्वाचन के कारण सभी उम्मीदवारों की जीत पहले ही तय हो गई थी।
इन चुनावों में जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता ललन प्रसाद का निर्वाचन विशेष रूप से चर्चा में रहा। वह पूर्व मुख्यमंत्री एवं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार द्वारा रिक्त की गई विधान परिषद सीट से निर्विरोध चुने गए हैं। यह सीट राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही थी और पूरे चुनाव के दौरान इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई थीं।
शपथ ग्रहण के साथ ही सभी 10 नवनिर्वाचित सदस्य अब आधिकारिक रूप से बिहार विधान परिषद की कार्यवाही में भाग लेने के पात्र हो गए हैं। वे सदन में जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने, विधायी कार्यों में हिस्सा लेने और राज्य के विकास से जुड़े विषयों पर अपनी भूमिका निभाएंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नए सदस्यों के सदन में आने से विधान परिषद की कार्यवाही को नई ऊर्जा मिलेगी और विभिन्न दलों के बीच मुद्दों पर सार्थक चर्चा देखने को मिल सकती है। आने वाले सत्रों में इन नए सदस्यों की भूमिका पर सभी की नजर रहेगी।


