West Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार सिर्फ मुद्दों की नहीं, बल्कि प्रतीकों और नैरेटिव की भी जबरदस्त लड़ाई देखने को मिली। चुनाव परिणाम सामने आते ही एक लोकगीत ‘हृदय माछे काबा, नयन-ए-मदीना’ चर्चा के केंद्र में आ गया, जिसने पूरे चुनावी माहौल को प्रभावित किया। बांग्लादेश के मशहूर कवि अब्दुल रहमान बोयाती का यह गीत पहले सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा था, लेकिन चुनावी मंच पर आने के बाद यह राजनीतिक बहस का कारण बन गया।
टीएमसी नेता सयानी घोष द्वारा मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में इस गीत को गाने से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई। भाजपा ने इसे तुरंत एक बड़े नैरेटिव में बदलते हुए ‘काली बनाम काबा’ की बहस छेड़ दी। भाजपा का आरोप था कि टीएमसी तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है, और यह गीत उसी सोच को दर्शाता है। यह नैरेटिव तेजी से जनता के बीच फैल गया और चुनावी माहौल को प्रभावित करने लगा।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का ‘मां, माटी और मानुष’ का नारा इस बार कमजोर पड़ता नजर आया
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का ‘मां, माटी और मानुष’ का नारा इस बार कमजोर पड़ता नजर आया। भाजपा ने ‘जय श्रीराम’ के साथ ‘जय मां काली’ के नारों को जोर-शोर से उठाया और इसे बंगाल की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ दिया। भाजपा नेताओं अमित शाह और योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे को आक्रामक तरीके से उठाते हुए इसे चुनावी केंद्र बना दिया।
मोदी ने भी बिहार की जीत के बाद बंगाल में जीत का रास्ता खुलने की बात कही थी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बिहार की जीत के बाद बंगाल में जीत का रास्ता खुलने की बात कही थी, जो अब सच होती दिख रही है। भाजपा ने इस चुनाव में धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ-साथ ‘बंगाली अस्मिता’ को भी मजबूती से उठाया। माछ-भात जैसे स्थानीय मुद्दों को लेकर टीएमसी ने भाजपा पर हमला किया, लेकिन भाजपा ने ‘शाक्त परंपरा’ का सहारा लेकर इस आरोप को बेअसर करने की कोशिश की।
महिला वोटर्स को साधने के लिए भी दोनों पार्टियों में कड़ी टक्कर देखने को मिली। टीएमसी ने ‘लक्ष्मीर भंडार’ योजना के तहत राशि बढ़ाई, जबकि भाजपा ने उससे दोगुनी सहायता देने का वादा किया। महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भी भाजपा ने टीएमसी सरकार को घेरा और इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया। इसके अलावा, वोटर लिस्ट में बदलाव और ‘पन्ना प्रमुख’ मॉडल जैसी रणनीतियों ने भी भाजपा को बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई। अमित शाह की बूथ स्तर पर की गई तैयारी और संगठनात्मक मजबूती ने पार्टी को निर्णायक बढ़त दिलाई।
कुल मिलाकर, इस चुनाव में यह साफ हो गया कि सिर्फ विकास नहीं, बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक मुद्दे भी वोटरों को प्रभावित करते हैं। ‘काली बनाम काबा’ का नैरेटिव और विवादित गीत का असर टीएमसी पर भारी पड़ा और भाजपा के पक्ष में माहौल बन गया। 2011 से लगातार 15 साल की सत्ता के कारण पैदा हुई सत्ता विरोधी लहर और भ्रष्टाचार के आरोपों से निपटने के लिए भाजपा ने इस बार सीधे व्यक्तिगत हमले टीएमसी नेताओं पर करने बंद कर दिए। ममता बनर्जी की जगह पूरे सिस्टम और ‘सिंडिकेट राज’ को निशाने पर लिया गया। मतलब इस चुनाव के बाद मतगणना से प्राप्त रुझानों और आंकड़ों ने साफ कर दिया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए ये सारे फैक्टर काम कर गए और सबसे बड़ी बात ‘काली बनाम काबा’ का भाजपा का नैरेटिव ‘हृदय माछे काबा, नयन ए मदीना’ पर भारी पड़ गया।


