Bihar News: भागलपुर में आयोजित बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव समारोह के दौरान पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम और संविधान निर्माण को लेकर एक बड़ा बयान दिया, जिससे राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि देश की आजादी का पूरा श्रेय केवल महात्मा गांधी को देना उन हजारों क्रांतिकारियों के बलिदान का अपमान है, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने प्रसिद्ध गीत “साबरमती के संत” का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास को संतुलित दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है।
बृजभूषण शरण सिंह ने कई वीर स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख करते हुए कहा कि रानी लक्ष्मीबाई, वीर कुंवर सिंह, बिरसा मुंडा और देवी बख्श सिंह जैसे योद्धाओं को इतिहास में वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे। उन्होंने कहा कि समाज ने लंबे समय तक इन क्रांतिकारियों के योगदान पर पर्याप्त चर्चा नहीं की, जो एक बड़ी भूल है।
अपने भाषण के दौरान उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियां “जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध” का उल्लेख करते हुए कहा कि तटस्थ रहना भी एक तरह का अपराध है, खासकर जब देश के इतिहास की बात हो।
संविधान निर्माण के विषय में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान केवल डॉ. भीमराव अंबेडकर का कार्य नहीं था, बल्कि संविधान सभा के 242 अन्य विद्वान सदस्यों का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने विशेष रूप से बिहार के प्रतिनिधियों की भूमिका को सराहा और कहा कि उनके योगदान को भी उचित पहचान मिलनी चाहिए।
कार्यक्रम से पहले बृजभूषण शरण सिंह और जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह का शहर में भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद दोनों नेताओं ने जीरो माइल चौक स्थित वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
टाउन हॉल में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने वीर कुंवर सिंह के जीवन और उनके अदम्य साहस पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में वीर कुंवर सिंह ने 80 वर्ष की आयु में अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा संभाला और अपने पराक्रम से इतिहास रच दिया।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उनके योगदान को याद करते हुए देशभक्ति और बलिदान की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।


