Jamshedpur : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा इलाके में सुवर्णरेखा नदी का तट इन दिनों दहशत का केंद्र बन गया है। 17 मार्च को यहां 500 पाउंड का अमेरिकी बम मिलने के बाद अब एक और बम की पुष्टि ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। ग्रामीणों का दावा है कि जमीन के नीचे 8 और खतरनाक बम दबे हो सकते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।
ड्रोन सर्वे में मिला दूसरा बम
सोमवार को भारतीय सेना की बम निरोधक दस्ता (BDS) टीम ने पनिपाड़ा-नागुडसाई मार्ग पर घटनास्थल का ड्रोन सर्वे किया। आधुनिक उपकरणों से ली गई तस्वीरों में एक और बम होने के संकेत मिले। फिलहाल इसे निष्क्रिय बताया जा रहा है, लेकिन इसकी मौजूदगी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
दशकों पुराना लेकिन आज भी घातक
बरामद बम ‘AN-M64 500 lb’ मार्क का अमेरिकी हवाई बम है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के समय का माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इतने वर्षों बाद भी इसका विस्फोटक पदार्थ सक्रिय और बेहद खतरनाक हो सकता है। जरा सी चूक बड़े विस्फोट का कारण बन सकती है।
2 किलोमीटर का इलाका ‘नो-गो जोन’ घोषित
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना ने घटनास्थल के चारों ओर 2 किलोमीटर के दायरे को ‘नो-गो जोन’ घोषित कर दिया है। पुलिस ने पूरे क्षेत्र को सील कर दिया है और आम लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। पहले बम के मिलने के बाद 6 दिनों तक सुरक्षा में ढील को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
तलाशी अभियान तेज, और बम मिलने की आशंका
सेना की टीम ने बरामद बम को अपने कब्जे में लेकर मेटल डिटेक्टर से पूरे इलाके में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। स्थानीय प्रशासन भी इस ऑपरेशन में पूरा सहयोग कर रहा है। घाटशिला एसडीपीओ अजीत कुजूर के मुताबिक, जल्द ही दोनों बमों को सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज किया जा सकता है।
‘UXO हॉटस्पॉट’ बनने का खतरा
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एक के बाद एक बम का मिलना इत्तेफाक नहीं हो सकता। यह पूरा इलाका ‘अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस’ (UXO) का हॉटस्पॉट हो सकता है। यदि ग्रामीणों का दावा सही साबित होता है और जमीन के नीचे और बम मिलते हैं, तो यह इलाका एक बड़े विस्फोटक भंडार के ऊपर बसा हो सकता है, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

