Palamu : सरहुल पर्व के मौके पर झारखंड के पलामू में इस बार आस्था और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला। करीब 200 से ज्यादा गांवों से ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में जुलूस निकालते हुए मेदिनीनगर पहुंचे। मांदर की थाप और नगाड़ों की गूंज के बीच पूरा इलाका सरहुलमय हो गया। इस भव्य जुलूस में हजारों लोग शामिल हुए, जिससे शहर का माहौल पूरी तरह उत्सव में बदल गया।
पुलिस लाइन में भी गूंजा सरहुल का रंग
जुलूस से पहले पलामू पुलिस लाइन में सरहुल पूजा का आयोजन किया गया। इस दौरान पलामू जोनल आईजी शैलेंद्र कुमार सिन्हा और एसपी रीष्मा रमेशन ने पूजा में हिस्सा लिया। खास बात ये रही कि आईजी ने पुलिस जवानों के साथ मांदर बजाकर उत्सव का आनंद लिया, जबकि एसपी ने जवानों के साथ झूमर खेलकर माहौल को और रंगीन बना दिया। पुलिस और आम जनता के बीच इस तरह का जुड़ाव देखने लायक था।
प्रकृति पूजा का संदेश और सांस्कृतिक एकता
पूजा के दौरान आईजी शैलेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि सरहुल सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और आभार का प्रतीक है। उन्होंने पुलिसकर्मियों के साथ इस पर्व को मनाने को एक खास अनुभव बताया। वहीं एसपी रीष्मा रमेशन ने सभी को सरहुल की शुभकामनाएं दीं। यह आयोजन पिछले तीन सालों से लगातार पुलिस लाइन में किया जा रहा है, जो परंपरा और आधुनिक व्यवस्था के मेल को दर्शाता है।
जिला स्कूल मैदान में हुआ भव्य मिलन
पलामू के अलग-अलग गांवों से निकले सभी जुलूस अंततः मेदिनीनगर के जिला स्कूल मैदान में आकर एकत्र हुए। यहां हजारों लोगों का मिलन हुआ और सामूहिक रूप से प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया गया। पारंपरिक नृत्य, गीत और रीति-रिवाजों ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। इस पूरे आयोजन का नेतृत्व आदि कुडुख सरना समाज ने किया।
सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था रही सख्त
इतने बड़े आयोजन को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा। शहर में ट्रैफिक रूट डायवर्ट किए गए और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। शहर से गुजरने वाली गाड़ियों को नेशनल हाईवे बाईपास से जाने का निर्देश दिया गया था, जिससे जुलूस शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।


