Ranchi News : झारखंड हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर रांची के एसएसपी राकेश रंजन, हटिया के डीएसपी प्रमोद कुमार मिश्रा और डोरंडा थाना की अफसर-इंचार्ज दीपिका प्रसाद के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद वाहन रिलीज करने से इनकार कर न्यायिक आदेश की अवहेलना की है। इसे “जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण” रवैया बताया गया है।
रील बनाने के आरोप के बीच सड़क पर हुआ विवाद
एसोसिएशन के अनुसार, 17 फरवरी 2026 को अधिवक्ता मनोज टंडन अपने कार्यालय से झारखंड हाई कोर्ट जा रहे थे। राजेंद्र चौक के पास एक तेज रफ्तार मोटरसाइकिल सवार मवाज खान ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए उनकी कार को छू दिया। आरोप है कि इसके बाद कुछ लोगों ने मौके पर घेराव कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की और पूरी घटना को सोशल मीडिया रील बनाने के उद्देश्य से उकसाया गया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
दो एफआईआर पर हाई कोर्ट की रोक, वाहन रिलीज का आदेश
मामले में डोरंडा थाना कांड संख्या 51/2026 और 52/2026 दर्ज हुई। अधिवक्ता ने इसे चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। 19 फरवरी 2026 को हाई कोर्ट ने दोनों एफआईआर पर रोक लगा दी और वाहन रिलीज के लिए सक्षम न्यायालय में आवेदन करने का निर्देश दिया। इसके बाद 21 फरवरी 2026 को न्यायिक दंडाधिकारी (JM-XIII), रांची ने बीएनएसएस की धारा 497 के तहत वाहन रिलीज का आदेश पारित किया।
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आदेश के बावजूद वाहन नहीं सौंपा, आंदोलन की चेतावनी
एसोसिएशन का आरोप है कि रिलीज ऑर्डर मिलने के बाद भी डोरंडा थाना प्रभारी ने वाहन सौंपने से इनकार कर दिया। वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। पत्र में राजेंद्र चौक को संवेदनशील इलाका बताते हुए पूर्व की घटनाओं का जिक्र किया गया है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यभर के अधिवक्ता लोकतांत्रिक और कानूनी तरीकों से आंदोलन करेंगे और मामले को दोबारा हाई कोर्ट के संज्ञान में लाया जाएगा।
