Political Row Over Maiyaan Yojna : झारखंड में नगर निकाय चुनाव के बीच मंईयां सम्मान योजना के लाभार्थियों को बिना गारंटी 20 हजार रुपये तक का लोन देने की घोषणा ने सियासत गरमा दी है। इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। मामला अब राज्य निर्वाचन आयोग तक पहुंच चुका है, जिससे चुनावी माहौल और ज्यादा तीखा हो गया है।
टॉप बैंड: बीजेपी का निर्वाचन आयोग में शिकायत पत्र
सोमवार को बीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल सुधीर श्रीवास्तव के नेतृत्व में राज्य निर्वाचन आयोग पहुंचा और लिखित शिकायत दर्ज कराई। प्रतिनिधिमंडल में अशोक बड़ाईक, सीमा सिंह सहित अन्य नेता शामिल थे। आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद को सौंपे गए ज्ञापन में बीजेपी ने मीडिया में प्रकाशित खबरों का हवाला देते हुए इसे आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन बताया।
टॉप बैंड: आचार संहिता उल्लंघन का आरोप
बीजेपी नेताओं का आरोप है कि नगर निकाय चुनाव की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है, लेकिन सरकार इसे मानने को तैयार नहीं है। सुधीर श्रीवास्तव ने कहा कि आचार संहिता के दौरान सरकार के इशारे पर यह खबर छपवाई गई है, ताकि मंईयां योजना के लाभार्थियों को प्रलोभन देकर चुनाव को प्रभावित किया जा सके।
टॉप बैंड: जांच और कार्रवाई की मांग
बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से मांग की कि यह पता लगाया जाए कि इस खबर के पीछे कौन अधिकारी या पदाधिकारी हैं और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। साथ ही बीजेपी ने यह भी दोहराया कि निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं कराए गए, जबकि पार्टी लगातार इसकी मांग करती रही है। आयोग ने इसे गंभीर मामला बताते हुए जांच का आश्वासन दिया है।
टॉप बैंड: कांग्रेस का पलटवार
इस पूरे विवाद पर कांग्रेस ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। झारखंड कांग्रेस के प्रदेश महासचिव और मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि सिर्फ अखबार में छपी खबर के आधार पर निर्वाचन आयोग जाना बीजेपी की घबराहट दिखाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने इस संबंध में कोई अधिसूचना जारी की है या किसी मंत्री-अधिकारी ने आधिकारिक बयान दिया है?
Read More : क्या शिबू सोरेन की बेटी Anjani Soren होंगी झामुमो की राज्यसभा उम्मीदवार? क्या हेमंत सोरेन देंगे हरी झंडी?
टॉप बैंड: हार के डर का आरोप
राकेश सिन्हा ने दावा किया कि बीजेपी नेताओं को अपनी हार का डर सता रहा है, इसलिए वे आयोग और मीडिया के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड में बीजेपी के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसी वजह से वह ऐसे विवाद खड़े कर रही है। अब इस पूरे मामले पर सभी की नजरें राज्य निर्वाचन आयोग की जांच और उसके फैसले पर टिकी हैं।
