East Champaran:- चंपारण प्रक्षेत्र के डीआईजी हरकिशोर राय ने पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। सुगौली सर्किल के इंस्पेक्टर अशोक पांडेय और एक कांड की अनुसंधानकर्ता दरोगा निधि कुमारी को रिश्वतखोरी और लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई मोतिहारी एसपी स्वर्ण प्रभात की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
जानकारी के अनुसार दोनों पुलिसकर्मियों पर सड़क दुर्घटना के एक मामले में मुख्य आरोपी को बचाने के लिए 60 हजार रुपये रिश्वत लेने और पीड़िता पर दबाव बनाने का गंभीर आरोप था। इस पूरे मामले का खुलासा मोतिहारी एसपी के जनता दरबार में हुआ, जहां पीड़िता इमतरी खातुन ने सुगौली थाना कांड संख्या 438/25 में न्याय की गुहार लगाई थी। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि पुलिस निष्पक्ष जांच नहीं कर रही है और आरोपी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी स्वर्ण प्रभात ने प्रशिक्षु डीएसपी ऋषभ कुमार से जांच कराई। जांच में पुलिसिया भ्रष्टाचार के पुख्ता साक्ष्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार 15 अगस्त 2025 को एक सड़क दुर्घटना में ट्रैक्टर की टक्कर से पीड़िता के पति की मौत हो गई थी। घटना के महज एक सप्ताह के भीतर सर्किल इंस्पेक्टर अशोक पांडेय ने ट्रैक्टर मालिक ब्रजेश कुमार मिश्रा से सांठगांठ कर ली और स्वयं मध्यस्थता करते हुए 60 हजार रुपये की रिश्वत ली।
जांच में यह भी सामने आया कि पीड़िता पर दबाव बनाया गया ताकि ट्रैक्टर मालिक का नाम प्राथमिकी में न आए। बताया गया कि ट्रैक्टर मालिक का भाई बिहार पुलिस में दरोगा है और वह सर्किल इंस्पेक्टर का बैचमेट भी है। मोबाइल कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (सीडीआर) से यह पुष्टि हुई कि सर्किल इंस्पेक्टर लगातार ट्रैक्टर मालिक के भाई के संपर्क में थे। इसी प्रभाव के कारण चार महीने बीत जाने के बावजूद जानबूझकर कांड की पर्यवेक्षण टिप्पणी जारी नहीं की गई।
इस मामले में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में अनुसंधानकर्ता दरोगा निधि कुमारी को भी निलंबित कर सामान्य जीवन भत्ता पर भेज दिया गया है। उनसे विभागीय कार्रवाई के संबंध में स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
डीआईजी की इस सख्त कार्रवाई के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

