Patna News: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने राज्य की राजनीति की पारंपरिक धारणाओं को झकझोर कर रख दिया है। दशकों से महागठबंधन खासकर राजद की राजनीति का आधार रहे एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण को इस बार करारा झटका लगा है। इसके बदले, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नया एमवाई फार्मूला — महिला + युवा — पूरे चुनाव का असली गेमचेंजर बनकर उभरा।
इस चुनाव में एनडीए को मिले भारी जनादेश के पीछे सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है महिलाओं और युवाओं को साधने की नीतीश कुमार की रणनीति। महिलाओं के लिए चलाई गई ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’, शराबबंदी, सुरक्षा व्यवस्था में सुधार, और लड़कियों की शिक्षा पर विशेष फोकस ने महिला मतदाताओं को बड़ी संख्या में राजग के पक्ष में खड़ा किया। इसी तरह, युवाओं को रोजगार, कौशल विकास और 2005 से पहले के ‘जंगलराज’ की याद दिलाकर एनडीए ने युवा वर्ग को भी मजबूती से प्रभावित किया।
इस चुनाव में मतदान का भी नया रिकॉर्ड बना। दोनों चरणों में कुल 67% मतदान हुआ, जिसमें महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से कहीं अधिक रही। जहां पुरुष मतदान 62.8% रहा, वहीं महिलाओं का मतदान प्रतिशत 71.6% दर्ज किया गया। महिलाओं की इस ऐतिहासिक भागीदारी ने चुनावी समीकरण को पूरी तरह बदलकर रख दिया।
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि मुस्लिम बहुल इलाकों में भी इस बार एनडीए को अप्रत्याशित समर्थन मिला। इन क्षेत्रों में राजग उम्मीदवारों ने न सिर्फ कड़ी टक्कर दी, बल्कि कई सीटों पर जीत भी दर्ज की। इससे महागठबंधन का पारंपरिक एमवाई वोटबैंक बिखरता हुआ नजर आया।
बिहार के कई मतदान केंद्रों पर महिलाओं की लंबी-लंबी कतारें दिख रही थीं, जो इस बार के परिणामों की दिशा पहले ही संकेत दे रही थीं। राज्य में 3.94 करोड़ पुरुष और 3.51 करोड़ महिला मतदाता पंजीकृत थे, लेकिन मतदान में महिलाओं का उत्साह सबसे अलग दिखा।
कुल मिलाकर, रुझानों और नतीजों से साफ है कि बिहार की जनता ने एक बार फिर ‘सुशासन मॉडल’ और नीतीश कुमार के नए सामाजिक समीकरण पर भरोसा जताया है। महागठबंधन का पुराना एमवाई फार्मूला कमजोर पड़ा और महिला–युवा शक्ति ने एनडीए को बड़ी जीत दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई।

