Nalanda News:- नालंदा जिले में दीपावली के पहले उत्सव का माहौल उस वक्त मातम में बदल गया जब कार्बाइड गन से पटाखा फोड़ने के दौरान पांच लोगों की एक-एक आंख की रोशनी चली गई। यह हादसा जिले के विभिन्न इलाकों में हुआ, जहां लोग देसी तरीके से बने पटाखे चलाने का प्रयास कर रहे थे। सभी घायल व्यक्तियों को इलाज के लिए खंदकपर स्थित कुमार नेत्रालय लाया गया, जहां नेत्र विशेषज्ञ डॉ. नीतीश कुमार ने उनकी हालत गंभीर बताई है।
डॉ. कुमार ने बताया कि यह कार्बाइड गन कैल्शियम कार्बाइड, प्लास्टिक पाइप और गैस लाइटर की मदद से तैयार की जाती है। जब कार्बाइड पानी के संपर्क में आता है, तो उससे एसीटिलीन गैस बनती है, जो हल्की चिंगारी से ही जोरदार विस्फोट कर देती है। इस विस्फोट से पाइप और अन्य सामग्री के टुकड़े छर्रों की तरह आंखों और चेहरे में घुस जाते हैं। उन्होंने बताया कि कई मरीजों की रेटिना फट जाने के कारण उनकी आंखों की रोशनी स्थायी रूप से चली गई है, जबकि कुछ के चेहरे और पलकों की त्वचा भी गंभीर रूप से झुलस गई है।
विशेषज्ञ ने कहा कि ऐसे हादसे ज्यादातर बच्चों और किशोरों के साथ हो रहे हैं, जो बिना जानकारी के इस खतरनाक खेल में शामिल हो जाते हैं। डॉ. कुमार ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को ऐसे जुगाड़ वाले पटाखों से दूर रखें और प्रशासन से अनुरोध किया है कि इस तरह के देसी विस्फोटक बनाने और बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी सलाह दी कि यदि किसी की आंख में चोट लगती है तो आंख पर दबाव न डालें, उसे साफ कपड़े से हल्के से ढकें और तुरंत नजदीकी नेत्र चिकित्सक से संपर्क करें। डॉक्टरों ने इसे ‘खतरनाक चलन’ बताते हुए कहा कि थोड़ी लापरवाही किसी की जिंदगी भर की रोशनी छीन सकती है।

