Ranchi News:- झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में लंबे समय से टल रहे स्थानीय निकाय चुनावों पर नाराजगी जताई है। मंगलवार को हुई सुनवाई में मुख्य सचिव और नगर विकास सचिव को अदालत के आदेश पर सशरीर उपस्थित होना पड़ा।जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के पूर्व आदेश के बावजूद चुनाव प्रक्रिया समय पर प्रारंभ नहीं की गई है, जो गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने उपस्थित दोनों अधिकारियों को निर्देश दिया कि आदेश का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करें और चुनाव की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।
मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। उस दिन राज्य सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि अब तक चुनाव क्यों नहीं कराए गए और आगे की ठोस कार्ययोजना क्या है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि सरकार समय पर कार्रवाई नहीं करती है, तो इसे न्यायालय की अवमानना माना जाएगा।
दरअसल, स्थानीय निकाय चुनाव में देरी को लेकर निवर्तमान पार्षद रौशनी खलखो ने उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि अदालत ने पहले ही चुनाव कराने का निर्देश दिया था, लेकिन सरकार ने अब तक चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं की है
विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय निकाय चुनाव में देरी का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। नगर निगम और नगर परिषदों के माध्यम से जनता को बुनियादी सुविधाएं मिलती हैं। चुनाव न होने से निर्वाचित प्रतिनिधियों की कमी के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
अदालत ने यह भी साफ किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव की समयबद्धता बेहद जरूरी है। न्यायालय के आदेश का पालन न करना गंभीर विषय है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

