Jamshedpur News: श्रावण माह में दलमा स्थित प्राचीन शिव मंदिर में दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं से वन विभाग की ओर से पहली बार एंट्री फीस वसूले जाने के फैसले ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। इस फैसले को लेकर भाजपा नेता और हिंदू संगठनों ने राज्य सरकार पर सनातन आस्था पर हमला करने का आरोप लगाया है। ज्ञात हाे कि दलमा के प्राचीन शिव मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं से वन विभाग ने पहली बार प्रवेश शुल्क वसूलने का आदेश जारी किया है। इसके तहत पैदल श्रद्धालुओं से पांच रुपये, दोपहिया वाहन से 50 रुपये, तीन पहिया वाहन से 100 रुपये और चार पहिया वाहन से 150 रुपये शुल्क लिया जाएगा
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सह पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई ने फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार को श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने का कोई अधिकार नहीं है। भाजपा के पूर्व जिला मीडिया प्रभारी अंकित आनंद ने इस मुद्दे को ट्विटर पर उठाते हुए वन विभाग के निर्णय को तुगलकी फरमान बताया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उपायुक्त से इसे अविलंब रद्द करने की मांग की।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शहदेव ने अंकित आनंद के ट्वीट को रीपोस्ट करते हुए लिखा कि सनातनी आस्था पर टैक्स अविलंब समाप्त किया जाए। उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह आधुनिक युग का जजिया कर थोपने जैसा है, जिसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एक ओर देवघर और बासुकिनाथ में करोड़ों रुपये खर्च कर श्रावणी मेले में सुविधाएं दे रही है। वहीं जमशेदपुर डीएफओ श्रावण में भगवान शिव के भक्तों से प्रवेश शुल्क वसूल रहे हैं। उन्होंने सरायकेला उपायुक्त से इस फैसले में हस्तक्षेप कर अविलंब रोक लगाने की मांग की।
इस फैसले को लेकर हिंदू संगठनों में भी भारी नाराजगी देखी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कई हिंदूवादी संगठन जल्द ही इसके विरोध में प्रदर्शन और जनआंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
विश्व हिंदू परिषद ने इसे जजिया कर जैसा बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया और मंगलवार को प्रदर्शन किया। कहा कि यह प्राचीन धार्मिक परंपराओं पर कर लगाने जैसा अन्यायपूर्ण कदम है। परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि इतिहास में जजिया कर हिंदू समाज के प्रति भेदभाव और उनकी आस्था पर हमला था। परिषद ने प्रभागीय वन पदाधिकारी, वन एवं पर्यावरण विभाग, जमशेदपुर से मांग की है कि इस आदेश को तुरंत निरस्त किया जाए और श्रद्धालुओं के हितों की रक्षा की जाए।
परिषद के विभाग मंत्री अजय गुप्ता, अरुणा सिंह और सुबिता ने भी इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि सावन के पवित्र महीने में ऐसा शुल्क शिवभक्तों की आस्था और भावना को ठेस पहुंचाता है। उन्होंने आग्रह किया कि धार्मिक यात्रियों पर किसी भी प्रकार का शुल्क न लगाया जाए।
हिंदू जागरण मंच के प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य जय गिरि गोस्वामी ने इस फैसले को सनातन संस्कृति पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि श्रावण माह में बाबा भोलेनाथ को जल चढ़ाने से कोई नहीं रोक सकता। यह किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
महावीर संघ चाईबासा के संरक्षक दीपक कुमार गुप्ता ने भी इस निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार विकास योजनाओं के प्रचार में व्यस्त है लेकिन भक्तों पर कर थोपना दुर्भाग्यपूर्ण है। क्या अब अपने ही मंदिर में पूजा के लिए भी कर देना होगा।

