Ramgarh News: झारखंड का पतरातू अपनी हरी-भरी वादियों और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है। राज्य सरकार और पर्यटन विभाग लगातार इस क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। लेकिन इस बीच कुछ पूंजीपतियों और भू-माफियाओं ने प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाकर मुनाफे का जरिया बना लिया है।
जानकारी के अनुसार, पतरातू प्रखंड के ताराटांड़ और हरिहरपुर में बड़े पैमाने पर ईटरनिटी और अलेक्सा नामक दो आलीशान रिजॉर्ट का निर्माण किया गया है। ये दोनों रिजॉर्ट कथित तौर पर ऐसी जमीन पर बने हैं, जो सरकारी रिकॉर्ड में जंगल-झाड़ी वाली भूमि के रूप में दर्ज है। रामगढ़ वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) नीतीश कुमार ने दोनों रिजॉर्ट का स्थल निरीक्षण किया था। जांच के दौरान यह सामने आया कि जिस भूखंड पर निर्माण हुआ है, वह वन संरक्षण अधिनियम 1980 के प्रावधानों के दायरे में आता है। डीएफओ ने सैटेलाइट इमेज और सुपर इंपोज्ड सर्वे मैप के जरिए स्पष्ट किया था कि यह क्षेत्र जंगल झाड़ी चिह्नित भूमि के दायरे में है।
निरीक्षण के बाद डीएफओ नीतीश कुमार ने 16 जनवरी 2025 को रामगढ़ के उपायुक्त (डीसी) को एक चिट्ठी लिखकर मामले की गहन जांच की मांग की थी। चिट्ठी में चार बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने को कहा गया था, ताकि यह तय किया जा सके कि दोनों रिजॉर्ट का निर्माण कानूनी है या नहीं। साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि क्या इस निर्माण में वन संरक्षण अधिनियम 1980 की धाराओं का उल्लंघन हुआ है।
डीएफओ ने यह भी अनुरोध किया था कि इस मामले में यदि पहले कोई जांच प्रक्रिया चल चुकी है या लंबित है, तो उसकी समीक्षा कर रिपोर्ट वन प्रमंडल कार्यालय को भेजी जाए।हालांकि, चिट्ठी भेजे जाने के आठ महीने बाद भी वन विभाग को डीसी कार्यालय से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। इस मामले में विभागीय कार्रवाई की धीमी रफ्तार कई सवाल खड़े कर रही है।
वन विभाग के अनुसार, दोनों रिजॉर्ट की जमीन वन क्षेत्र में आती है, लेकिन जब तक आधिकारिक जांच रिपोर्ट नहीं आती, विभाग कोई अंतिम निर्णय नहीं ले सकता। इस देरी के कारण न केवल वन संरक्षण कानून पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि यह भी साफ हो रहा है कि बड़े पैमाने पर प्रभावशाली लोगों के दबाव में पर्यावरण से जुड़े गंभीर मामलों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

