Lohardaga News;- जिले में सोमवार को शारदीय नवरात्र का शुभारंभ पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ हुआ। सुबह से ही भक्तों ने मां दुर्गा की आराधना करते हुए कलश स्थापना की और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा। जगह-जगह साफ-सफाई और स्वच्छ माहौल के बीच देवी गीतों की गूंज से पूरा जिला भक्तिरस में डूब गया। इस मौके पर पंडित अखिलेश मिश्रा ने बताया कि शक्ति, ऐश्वर्य, ज्ञान और विज्ञान की अधिष्ठात्री देवियां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती हैं। इन्हीं तीन महाशक्तियों का संयुक्त स्वरूप मां दुर्गा है। इसी पराशक्ति से ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत संपूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति हुई है। देवी स्वयं कहती हैं कि समस्त विश्व उन्हीं में समाहित है और उनके सिवा कोई अविनाशी वस्तु नहीं है।
दुर्गासप्तशती में नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की महिमा का वर्णन मिलता है। शैलपुत्री का अर्थ है पर्वतराज हिमालय की पुत्री। पुराणों के अनुसार, जब राजा दक्ष ने यज्ञ में भगवान शिव का अपमान किया, तो सती ने स्वयं को यज्ञ वेदी में आहुति दे दी। इसके बाद उन्होंने कठोर तपस्या कर पार्वती के रूप में जन्म लिया। हिमालय की पुत्री होने के कारण ही वे शैलपुत्री कहलायीं। इनके अन्य नाम शैलजा, उमा और गौरी भी प्रसिद्ध हैं। भगवान शिव को पाने के लिए उन्होंने कठोर तप किया और अपर्णा नाम से विख्यात हुईं।
मां शैलपुत्री को शिव की शक्ति और जगतजननी माना जाता है। प्रकृति के सभी अजर-अमर तत्व उन्हीं के अधीन हैं। नवरात्र की शुरुआत उनकी पूजा-अर्चना से होती है। शास्त्रों के अनुसार, मां शैलपुत्री की आराधना करने से भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे चारों पुरुषार्थ प्राप्त होते हैं और वे अपने जीवन में मनोवांछित फल पाते हैं।

