News Delhi News:- संसद के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार को विपक्ष के भारी विरोध और हंगामे के साथ हुई। विपक्षी दलों ने 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले और उसके जवाब में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर पर नियम 267 के तहत तत्काल चर्चा की मांग की। राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने नारेबाजी शुरू कर दी और अपनी मांगें ना माने जाने पर सदन से बहिर्गमन कर दिया। इस दौरान राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि पहलगाम में हुआ हमला कायरतापूर्ण था, जिसने पूरे देश की आत्मा को झकझोर कर रख दिया।
धनखड़ ने यह भी कहा कि देश ने एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया, जिससे यह साबित होता है कि भारत अपनी एकता और अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि आतंकियों को अब तक न पकड़ा गया, न मारा गया है। उन्होंने केंद्र सरकार से सीधा सवाल करते हुए कहा कि इंटेलिजेंस फेलियर की बात खुद उपराज्यपाल ने मानी है, तो देश को सच क्यों नहीं बताया जा रहा।
खरगे ने यह भी कहा कि सभी विपक्षी दलों ने सरकार को आतंकवाद के खिलाफ बिना शर्त समर्थन दिया है, फिर भी उन्हें जानकारी से वंचित रखा जा रहा है।
इस मुद्दे पर चर्चा के लिए विपक्ष ने 18 नोटिस दिए थे, जिन्हें सभापति ने खारिज कर दिया। वहीं बीजेपी सांसद शमिक भट्टाचार्य ने भी ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की मांग की।
इस बीच केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार पूरी पारदर्शिता से चर्चा को तैयार है और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी हर जानकारी देश के सामने रखी जाएगी। लेकिन विपक्ष के हंगामे के चलते राज्यसभा की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी गई।

