LPG Gas Shortage : देशभर में चल रही LPG गैस की किल्लत का असर अब होटल और रेस्टोरेंट के साथ-साथ मंदिरों में भी साफ दिखाई देने लगा है. कई मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए बनने वाला प्रसाद या तो कम कर दिया गया है या फिर अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है. कुछ स्थानों पर भक्तों को भोजन की जगह फल का प्रसाद दिया जा रहा है. देश के बड़े मंदिरों में रोजाना हजारों से लेकर लाखों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं, लेकिन गैस की कमी के कारण मंदिरों की रसोई धीरे-धीरे प्रभावित हो रही है. इसका असर मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं और प्रसाद पर निर्भर लोगों पर भी पड़ रहा है.
बनशंकरी मंदिर में अन्नप्रसादम सेवा ठप
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित प्रसिद्ध बनशंकरी मंदिर में 11 मार्च से निशुल्क अन्नप्रसादम और प्रसाद वितरण अस्थायी रूप से रोक दिया गया है. मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन भक्तों के लिए भोजन तैयार करने के लिए 5 से 6 कॉमर्शियल LPG सिलेंडरों की जरूरत पड़ती है. फिलहाल मंदिर के पास केवल चार सिलेंडर ही उपलब्ध हैं, जो पूरे दिन के भोजन के लिए पर्याप्त नहीं हैं. गैस की नियमित आपूर्ति न होने के कारण मंदिर प्रशासन को यह निर्णय लेना पड़ा. कई वर्षों से लगातार चल रही यह भोजन सेवा अब गैस संकट के कारण प्रभावित हो गई है, जिससे श्रद्धालुओं में नाराजगी भी देखी जा रही है.
महाराष्ट्र के मंदिरों में एहतियाती कदम
महाराष्ट्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों शिरडी और पंढरपुर में भी गैस की कमी का असर देखने को मिल रहा है. पंढरपुर स्थित श्री विट्ठल रुक्मिणी मंदिर समिति ने अन्न भंडार में गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए गैस एजेंसियों के साथ बैठक की है. मंदिर प्रशासन ने कहा है कि श्रद्धालुओं को भोजन में किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी. भविष्य में गैस की कमी होने की स्थिति में पारंपरिक तरीके से चूल्हे या डीजल आधारित व्यवस्था से खाना बनाने की योजना भी तैयार की गई है.
अंबाबाई और शिरडी में अलग-अलग हालात
कोल्हापुर के अंबाबाई मंदिर क्षेत्र में व्यावसायिक गैस आपूर्ति बंद होने से खाद्य स्टॉल संचालकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. कई स्टॉल मालिकों के पास केवल एक दिन की गैस बची है, जिसके बाद उन्हें अपने ठेले और दुकानें बंद करनी पड़ सकती हैं. वहीं शिरडी स्थित साईं बाबा संस्थान ने पहले से तैयारी करते हुए लगभग 20 टन गैस का भंडारण कर लिया है. संस्थान के साईं प्रसादालय में रोजाना बड़ी मात्रा में भोजन तैयार होता है. साथ ही सौर ऊर्जा परियोजना के उपयोग से प्रतिदिन करीब 200 किलोग्राम गैस की बचत हो रही है, जिससे फिलहाल श्रद्धालुओं को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा.

