Koderma News:- सदर अस्पताल कोडरमा में सिविल सर्जन और उपाधीक्षक के बीच जारी विवाद ने अब अस्पताल की व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। लंबे समय से कई स्वास्थ्यकर्मियों का वेतन रुका हुआ है और मरीजों को इलाज में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी को लेकर सदर अस्पताल बचाओ संघर्ष समिति ने शनिवार को उर्मिला चौधरी क्लिनिक कोडरमा से एक विशाल जुलूस निकाला और धरना प्रदर्शन किया।
धरना का नेतृत्व समिति के अध्यक्ष ईश्वर आनंद और सचिव प्रकाश रजक ने किया। इस दौरान सैकड़ों लोग शामिल हुए और “सदर अस्पताल बचाओ” के नारे लगाए।
ईश्वर आनंद ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत लाखों रुपए खर्च कर सदर अस्पताल में आधुनिक मशीनरी और ऑपरेशन थिएटर बनाए गए। आंख विभाग में करोड़ों की लागत से उपकरण खरीदे गए, वहीं ऑर्थोपेडिक विभाग में भी लाखों की मशीनरी स्थापित की गई। लेकिन हैरानी की बात है कि पिछले छह महीनों में एक भी ऑपरेशन नहीं किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि उपाधीक्षक रंजीत कुमार बार-बार जिले में पदस्थापित होकर नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। उनके पिछले कार्यकाल में भी जननी सुरक्षा योजना में वित्तीय गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई थीं, जिसकी रिपोर्ट उपायुक्त से लेकर विभागीय सचिव तक भेजी गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
संघर्ष समिति के सचिव प्रकाश रजक ने कहा कि अस्पताल में पहले संचालित अल्ट्रासाउंड सेवा को जानबूझकर बंद कर दिया गया, जबकि यह मरीजों के लिए सस्ती और उपयोगी थी। इससे गरीब मरीजों को निजी क्लीनिकों का सहारा लेना पड़ रहा है।
धरना स्थल पर समिति के उपाध्यक्ष संजय शर्मा, अज्जू सिंह, समाजसेवी रघुनाथ दास, कयुम उदीन, असगर अली, रामेश्वर यादव, ब्रह्मदेव दास, संतोष दास, रफीक मियां, पवन सिंह, सुरेंद्र दास, गीता देवी, विमला देवी समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया और जिला प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की।
धरने में शामिल लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

