Khunti News:- रविवार को खूंटी जिले में जीवित्पुत्रिका व्रत पूरे हर्षोल्लास और परंपरागत आस्था के साथ मनाया गया। इस दिन माताओं ने अपनी संतानों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए 24 घंटे का निर्जला उपवास रखा। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को रखने से बच्चों पर आने वाली विपत्तियां टल जाती हैं और उन्हें दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
शहर के कर्रा रोड, तोरपा रोड, पिपराटोली, मिश्रा टोली और बड़ाईक टोला सहित आसपास के गांवों और मोहल्लों में महिलाओं ने अपने घरों में पवित्र पीपल की डाली स्थापित कर पारंपरिक विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से पूजन अनुष्ठान आयोजित हुए, जहां महिलाएं एकत्र होकर भगवान से संतान की सलामती और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती दिखीं।
महिलाओं में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। जीवित्पुत्रिका व्रत केवल व्यक्तिगत पूजा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामूहिकता की झलक भी दिखी। शहर के अलावा विभिन्न क्षेत्रों में स्थित पीपल के पेड़ों के नीचे भी महिलाओं ने सामूहिक पूजा-अर्चना की। इस दौरान माहौल पूरी तरह धार्मिक आस्था और भक्ति से सराबोर हो गया।
खूंटी जिला मुख्यालय के साथ-साथ तोरपा, कर्रा, रनिया, मुरहू और अड़की प्रखंडों में भी यह पर्व पूरे श्रद्धाभाव से मनाया गया। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं ने परंपरागत गीत गाए और उपवास के दौरान दिन-रात भगवान से संतान की दीर्घायु की प्रार्थना की।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जीवित्पुत्रिका व्रत (जिसे जितिया व्रत भी कहा जाता है) पीढ़ियों से परंपरा का हिस्सा रहा है। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में मातृत्व की शक्ति और संतानों के प्रति माताओं की अटूट ममता का प्रतीक भी माना जाता है।

