Indian Navy : भारत के समुद्री व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारतीय नौसेना ने दुनिया के छह अहम समुद्री इलाकों में अपने युद्धपोत तैनात किए हुए हैं. यह तैनाती ‘मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ रणनीति के तहत की गई है, जिसकी शुरुआत साल 2017 में हुई थी. इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर लगातार निगरानी रखना और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करना है. मौजूदा समय में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री खतरों को देखते हुए यह तैनाती और भी महत्वपूर्ण हो गई है.
भारतीय व्यापारिक जहाजों को मिल रही सुरक्षा
पश्चिम एशिया में हालिया तनाव के बीच भारतीय नौसेना अपने व्यापारिक जहाजों को भी सुरक्षा प्रदान कर रही है. हाल ही में एलपीजी कैरियर ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ को सुरक्षित एस्कॉर्ट करते हुए भारतीय जलक्षेत्र की ओर भेजा गया. इसके बाद तीसरा भारतीय ध्वज वाला जहाज ‘जग लाडकी’ भी सुरक्षित रूप से भारत के लिए रवाना हो चुका है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारतीय नौसेना का एक युद्धपोत देर रात से ही इस जहाज को सुरक्षित समुद्री क्षेत्र तक एस्कॉर्ट कर रहा है, ताकि किसी तरह का खतरा जहाज तक न पहुंचे.
गल्प ऑफ एडन में एंटी-पायरेसी ऑपरेशन जारी
इस समय Gulf of Aden के आसपास भारतीय नौसेना के तीन युद्धपोत सक्रिय हैं. यहां ‘एंटी-पायरेसी ऑपरेशन’ चलाया जा रहा है, क्योंकि इस इलाके में सोमालिया और जिबूती के समुद्री लुटेरे पहले भी कई जहाजों को निशाना बना चुके हैं. दूसरी ओर Gulf of Oman के पास ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत भारतीय नौसेना की तैनाती जारी है. यहां गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर INS Surat समुद्री गतिविधियों पर नजर रख रहा है और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार है.
दुनिया के छह अहम समुद्री इलाकों में मौजूदगी
मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट के तहत भारतीय नौसेना के युद्धपोत Strait of Hormuz के पास अरब सागर क्षेत्र, Gulf of Aden, Seychelles के आसपास, Maldives के निकट हिंद महासागर क्षेत्र, Andaman and Nicobar Islands के पास इंडो-पैसिफिक मार्ग और Bay of Bengal में म्यांमार-बांग्लादेश सीमा के पास तैनात हैं. ये सभी क्षेत्र वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माने जाते हैं.
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भारत के समुद्री हितों की सुरक्षा पर फोकस
अगर अदन की खाड़ी का रास्ता बाधित हो जाए तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे Cape of Good Hope से होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ जाते हैं. ऐसे में इन मार्गों की सुरक्षा भारत के लिए बेहद जरूरी है. भारतीय नौसेना इन तैनातियों के दौरान मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ संयुक्त अभ्यास भी करती है और जरूरत पड़ने पर राहत व बचाव अभियान भी चलाती है. मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट को भारत के समुद्री हितों और वैश्विक व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीति माना जा रहा है.

