IDFC First bank Scam : आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी धन को अवैध रूप से विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने का मामला सामने आया है। हरियाणा सरकार के विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (SV&ACB) की जांच में यह सामने आया कि इस घोटाले के जरिए सरकारी विभागों के खातों से बड़ी रकम फर्जी कंपनियों के खातों में भेजी गई। मामले में अब तक 100 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज किया जा चुका है और 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
फर्जी कंपनियों के जरिए किया गया ट्रांजैक्शन
जांच एजेंसी के अनुसार, मुख्य आरोपियों ने कई फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी धन को अवैध रूप से ट्रांसफर किया। इन कंपनियों में आर एस ट्रेडर्स, कैप कंपनी फिनटेक सर्विसेज, एसआरआर प्लानिंग गुरुज प्राइवेट लिमिटेड और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट जैसी कंपनियां शामिल हैं। आरोप है कि सरकारी विभागों के खातों से धन को अनधिकृत तरीके से इन फर्जी कंपनियों के खातों में भेजा जाता था और बाद में उसे अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था।
23 फरवरी को दर्ज हुआ था मामला
इस पूरे मामले में 23 फरवरी को पंचकूला स्थित एसवी एंड एसीबी थाने में IDFC First Bank और AU Small Finance Bank के अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) और भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि 8 सरकारी विभागों के 12 बैंक खातों से अनधिकृत लेन-देन किया गया। इनमें से 10 खाते IDFC First Bank के सेक्टर-32 चंडीगढ़ शाखा में और 2 खाते AU Small Finance Bank में संचालित हो रहे थे।
16 जगहों पर छापेमारी, कई सबूत बरामद
जांच एजेंसी ने इस मामले में अब तक 16 अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की है। छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज, संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड और 25 से अधिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त किए गए हैं। इन उपकरणों की जांच साइबर फॉरेंसिक लैब में की जा रही है ताकि डिजिटल साक्ष्यों के जरिए पूरे घोटाले की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
लग्जरी वाहन भी किए गए जब्त
जांच के दौरान एजेंसी ने 3 फॉर्च्यूनर, 2 इनोवा और 1 मर्सिडीज सहित कुल 6 लग्जरी वाहन भी जब्त किए हैं। जांचकर्ताओं को संदेह है कि ये वाहन अपराध से अर्जित धन से खरीदे गए हैं। इसके अलावा 10 संपत्तियों की भी पहचान की गई है, जिन्हें घोटाले से जुड़े पैसों से खरीदे जाने का शक है।
बैंक रिकॉर्ड में की गई बड़ी हेराफेरी
जांच में यह भी सामने आया कि बैंक रिकॉर्ड में फर्जी डेबिट मेमो तैयार किए गए या बिना किसी वैध डेबिट मेमो और चेक के ही धनराशि ट्रांसफर कर दी गई। इसके अलावा फर्जी बैंक स्टेटमेंट भी तैयार किए गए ताकि ट्रांजैक्शन को वैध दिखाया जा सके। इन पैसों को उन खातों में भेजा गया जो सीधे या परोक्ष रूप से आरोपियों या उनके परिजनों से जुड़े हुए थे।
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जांच जारी, और गिरफ्तारी की संभावना
अब तक गिरफ्तार 11 आरोपियों में 6 बैंक कर्मचारी, 4 निजी व्यक्ति और एक सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। इनमें से 10 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि एक आरोपी पुलिस रिमांड पर है। जांच एजेंसी का कहना है कि बैंकों और सरकारी विभागों से प्राप्त रिकॉर्ड का गहन विश्लेषण किया जा रहा है ताकि पूरे फंड फ्लो का पता लगाया जा सके। साथ ही इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

