Ranchi News:- रांची विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन की लापरवाही से दर्जनों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है। विभाग की एक प्रशासनिक गलती के कारण कई विद्यार्थियों को अब तक छात्रवृत्ति की राशि नहीं मिल पाई है।
सूत्रों के अनुसार, विभाग ने 29 जुलाई 2025 को कल्याण विभाग को भेजे गए पत्र में खुद को रेगुलर विभाग के रूप में दर्शा दिया था, जबकि विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में यह विभाग वोकेशनल (व्यावसायिक) श्रेणी में दर्ज है। जब कल्याण विभाग ने रिकॉर्ड की जांच की और इस विसंगति पर सवाल उठाया, तब विभाग के निदेशक डॉ. बसंत झा ने अपनी गलती स्वीकार की।
इसके बाद छात्रों को खुद ही दस्तावेज़ सुधार कराने के लिए भाग-दौड़ करनी पड़ी और संशोधित पत्र कल्याण विभाग को सौंपा गया। लेकिन शुरुआती देरी और चूक की वजह से छात्रवृत्ति का आवंटन अन्य विभागों के विद्यार्थियों के बीच कर दिया गया।
इस गलती का सीधा खामियाजा अब मास कॉम विभाग के सैकड़ों जरूरतमंद छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। फिलहाल विभाग के पास फंड की भारी कमी है और छात्र-छात्राएं महीनों से छात्रवृत्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
प्रभावित छात्रों का कहना है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं और छात्रवृत्ति ही उनकी पढ़ाई का सहारा है। नाम न छापने की शर्त पर एक छात्रा ने कहा— “हमारे विभाग की गलती से हम जैसे जरूरतमंद विद्यार्थी संकट में आ गए हैं। हमारी सुनवाई न तो विश्वविद्यालय कर रहा है और न ही सरकार।”
छात्रों का आरोप है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि उनके भविष्य से खिलवाड़ है। यदि समय रहते दस्तावेज़ सही तरीके से भेजे जाते तो उन्हें भी छात्रवृत्ति का लाभ मिल जाता।
इस पूरी घटना से न केवल पढ़ाई पर आर्थिक दबाव बढ़ा है, बल्कि विद्यार्थियों में गहरी नाराजगी भी है। फिलहाल छात्र उम्मीद लगाए बैठे हैं कि राज्य सरकार और विश्वविद्यालय जल्द कोई ठोस समाधान निकाले, ताकि वे पढ़ाई जारी रख सकें।

