पश्चिम सिंहभूम: झारखंड के नक्सल प्रभावित सारंडा क्षेत्र के लेम्बरा गांव से दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां के दर्जनों मासूम बच्चे हर रोज़ उफनती कोयना नदी पार करके स्कूल जाते हैं। बिना पुल, नाव या किसी सुरक्षा के, ये बच्चे शिक्षा की ओर नहीं, बल्कि मौत के साये में सफर करते हैं।
लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कोयना नदी का जल स्तर काफी बढ़ चुका है। गांव के चारों ओर पानी भर जाने से लेम्बरा टापू में तब्दील हो गया है। इस स्थिति में न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि गर्भवती महिलाओं का इलाज, बीमार लोगों की चिकित्सा और जरूरी राशन की आपूर्ति तक ठप हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को कई बार पुल निर्माण की मांग की गई, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन मिले हैं। पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने पुल निर्माण को लेकर सर्वे कराया था, लेकिन आज तक उसकी फाइलें सरकारी दफ्तरों में धूल खा रही हैं।
पूर्व जिला पार्षद शंभू पासवान ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि ग्रामीणों के साथ गंभीर अन्याय है। उन्होंने सांसद जोबा मांझी और विधायक सोनाराम सिंकु से सवाल किया कि वर्षों पुरानी मांग के बावजूद पुल निर्माण क्यों नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक पुल का निर्माण नहीं होता, तब तक सुरक्षित नाव, बच्चों के लिए विशेष परिवहन, अस्थायी चिकित्सा शिविर और आपदा राहत केंद्रों की व्यवस्था तत्काल की जाए।
बच्चों का साहस भले प्रेरणादायक हो, लेकिन ऐसी हालत में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की है — और यह अब टालने का समय नहीं है।

