Child Safety Tips in Crowds : माता-पिता अपने बच्चों का हर परिस्थिति में पूरा ध्यान रखते हैं, लेकिन भीड़भाड़ वाली जगहों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत होती है। मेला, बाजार, रेलवे स्टेशन या किसी बड़े आयोजन में बच्चे का हाथ छूट जाना किसी भी माता-पिता के लिए बेहद डरावना अनुभव हो सकता है। ऐसी स्थिति में बच्चे अक्सर घबरा जाते हैं और उन्हें समझ नहीं आता कि क्या करना चाहिए। अगर माता-पिता पहले से ही बच्चों को कुछ आसान सेफ्टी नियम सिखा दें तो वे मुश्किल समय में सही तरीके से मदद ले सकते हैं और सुरक्षित अपने परिवार तक पहुंच सकते हैं।
नाम, पता और फोन नंबर याद होना जरूरी
कई बार बच्चे इसलिए भी अपने माता-पिता से नहीं मिल पाते क्योंकि उन्हें अपना पूरा नाम, माता-पिता का नाम या घर का पता ठीक से नहीं पता होता। इसलिए जरूरी है कि माता-पिता बच्चों को धीरे-धीरे ये सारी जानकारी याद करवाएं। बच्चों को कम से कम माता-पिता का नाम, शहर का नाम और घर का पता बताना आना चाहिए। इसके साथ ही परिवार के किसी सदस्य का फोन नंबर भी उन्हें याद होना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर वे किसी से मदद मांगकर तुरंत फोन कर सकें।
इमरजेंसी नंबर की जानकारी भी जरूरी
बच्चों को इमरजेंसी नंबरों की जानकारी देना भी बेहद जरूरी है। उन्हें यह बताया जाना चाहिए कि किन परिस्थितियों में पुलिस या अन्य आपातकालीन नंबरों पर कॉल किया जा सकता है। अगर बच्चे को सही समय पर इन नंबरों का उपयोग करना आ जाए तो वह जल्दी मदद पा सकता है और सुरक्षित अपने परिवार तक पहुंच सकता है।
खो जाएं तो घबराएं नहीं, एक जगह रुकें
जब भी माता-पिता बच्चों को किसी भीड़भाड़ वाली जगह जैसे मेला या बड़ा बाजार लेकर जाएं तो पहले ही उन्हें समझा दें कि अगर वे अलग हो जाएं तो इधर-उधर भागने के बजाय वहीं रुककर इंतजार करें। कई मेलों और आयोजनों में प्रशासन द्वारा खोया-पाया केंद्र बनाए जाते हैं। ऐसे में बच्चों को पहले ही यह जगह दिखा देना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर वे वहीं जाकर मदद मांग सकें।
सही व्यक्ति से मदद मांगना सिखाएं
बच्चों को यह भी सिखाना जरूरी है कि भीड़ में किससे मदद मांगनी चाहिए। अगर बच्चा खो जाए तो उसे पुलिसकर्मी, सिक्योरिटी गार्ड या ऐसे परिवार से मदद लेने के लिए कहना चाहिए जो अपने बच्चों के साथ वहां मौजूद हों। इसके अलावा माता-पिता बच्चों की कलाई या हथेली पर अपना फोन नंबर और नाम लिख सकते हैं। इससे अगर बच्चा घबरा भी जाए और जानकारी न दे पाए, तो भी कोई जिम्मेदार व्यक्ति उसे सुरक्षित उसके माता-पिता तक पहुंचा सकता है।

