Jamshedpur News:- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से जुड़ा एक अहम मामला सोमवार को चाईबासा स्थित विशेष एमपी-एमएलए न्यायालय में सुना गया। राहुल गांधी की ओर से अदालत में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्रदान करने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 205 के तहत दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायाधीश सुप्रिया रानी तिग्गा की अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले पर अंतिम फैसला 4 अक्टूबर को सुनाया जाएगा।
यह मामला पूर्व में दर्ज एक आपराधिक वाद से संबंधित है, जिसमें अदालत ने राहुल गांधी को ट्रायल की हर तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। राहुल गांधी की ओर से यह दलील दी गई है कि उनकी राजनीतिक जिम्मेदारियों और व्यस्तताओं को देखते हुए स्थायी रूप से व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी जाए।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कोर्ट के समक्ष तर्क रखते हुए कहा कि राहुल गांधी देशभर में राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं। हर सुनवाई पर व्यक्तिगत उपस्थिति उनके लिए संभव नहीं है। वकीलों ने यह भी कहा कि उनकी अनुपस्थिति में उनके अधिवक्ता अदालत की कार्यवाही में सहयोग कर सकते हैं, इसलिए उन्हें स्थायी छूट दी जानी चाहिए।
दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जब तक मामले का निपटारा नहीं होता, तब तक आरोपी को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना चाहिए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।
सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भी मौजूदगी रही। झारखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता दीपांकर राय, स्थानीय अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा और सरस्वती दास ने राहुल गांधी की ओर से पैरवी की। वहीं कांग्रेस प्रदेश महासचिव अमूल्य नीरज खलखो, जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर दास और जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय भी मौजूद थे।
फिलहाल सभी की निगाहें 4 अक्टूबर पर टिकी हैं, जब यह स्पष्ट होगा कि कोर्ट राहुल गांधी को व्यक्तिगत उपस्थिति से स्थायी छूट प्रदान करता है या नहीं।

