Patna News: बिहार विधानसभा चुनाव-2025 में एक बार फिर नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राजग को प्रचंड बहुमत दिलाया है। वहीं, दूसरी ओर महागठबंधन को इस बार सीमांचल की राजनीति ने करारा झटका दिया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने सीमांचल में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पांच सीटें अपने नाम कीं और साबित कर दिया कि क्षेत्र में उसकी पकड़ लगातार मजबूत हो रही है।
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने 25 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 23 मुस्लिम प्रत्याशी थे। पार्टी ने किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों पर फोकस किया। नतीजों ने भी यही दिखाया कि मुस्लिम वोटों के बड़े हिस्से पर एआईएमआईएम का प्रभाव बढ़ा है। जोकीहाट, बहादुरगंज, कोचाधामन, अमौर और बायसी सीट पर पार्टी ने आसान जीत दर्ज की। कुल मिलाकर एआईएमआईएम को 9.30 लाख से ज्यादा वोट मिले, जो 1.85% मतों के बराबर है।
विशेष रूप से जोकीहाट सीट पर एआईएमआईएम ने दूसरी बार बड़े नेताओं को मात देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। यहां एआईएमआईएम उम्मीदवार मोहम्मद मुर्शिद आलम ने तीन पूर्व मंत्रियों को हराया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, एआईएमआईएम ने मजबूत मुस्लिम उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया, जिससे महागठबंधन को भारी नुकसान हुआ और फायदा सीधा राजग को मिल गया।
विश्लेषक सुशील शुक्ल का कहना है कि 2020 में एआईएमआईएम के चार विधायकों को राजद में शामिल कराना तेजस्वी की बड़ी राजनीतिक भूल मानी गई थी। पार्टी की उस रणनीति से एआईएमआईएम का जनाधार मजबूत हुआ और उसने इस चुनाव में इसका ‘बदला’ ले लिया।
गौरतलब है कि चुनाव से पहले अख्तरुल ईमान ने राजद से गठबंधन के लिए जोरदार कोशिश की थी, लेकिन तेजस्वी यादव ने इसे ठुकरा दिया। अब राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि यह कदम महागठबंधन को भारी पड़ गया। स्पष्ट है कि ओवैसी की पार्टी को नजरअंदाज करना महागठबंधन की बड़ी रणनीतिक चूक साबित हुई, जिसका सीधा असर चुनावी नतीजों में दिखा।

