Hazaribagh News: झारखंड में नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। हजारीबाग ओपन जेल में बंद पूर्व नक्सली कमांडर सुरेश सिंह मुंडा ने सोमवारी हेमरम के साथ विवाह कर अपने जीवन की नई शुरुआत की। इस विवाह समारोह को खास बनाने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी भी शामिल हुए और बाराती की भूमिका निभाते हुए नवदंपती को सुखद वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दीं। यह मामला बुधवार को प्रकाश में आया।
पुलिस और प्रशासन की पहल पर संपन्न हुआ विवाह
जेल महानिरीक्षक (आईजी) सुदर्शन मंडल के अनुसार, सुरेश सिंह मुंडा रांची जिले के बुंडू थाना क्षेत्र के बारूहातू गांव के निवासी हैं। उनका विवाह तमाड़ क्षेत्र के अराहंगा गांव की रहने वाली सोमवारी हेमरम के साथ संपन्न हुआ। सुरेश सिंह मुंडा वर्तमान में हजारीबाग ओपन जेल में बंद हैं। उनके विवाह को संपन्न कराने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से विशेष पहल की गई थी।

समारोह के दौरान हजारीबाग पुलिस और जिला प्रशासन के कई अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर जिला विवाह पदाधिकारी राजेश एक्का ने विवाह का पंजीकरण कराया। अधिकारियों ने पारंपरिक बारातियों की तरह समारोह में भाग लिया और नवदंपती को नए जीवन की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं।
डीजीपी के निर्देश पर हुई पहल
अधिकारियों के मुताबिक, राज्य की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा के निर्देश पर पूर्व नक्सली कमांडर के विवाह की व्यवस्था कराने की पहल की गई थी। इस कदम का उद्देश्य आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने तथा उनके सामाजिक पुनर्वास को बढ़ावा देना है।
प्रशासन का मानना है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौटने वाले लोगों को सामाजिक और मानवीय सहयोग मिलना जरूरी है। ऐसे प्रयास पूर्व नक्सलियों को नई शुरुआत करने का अवसर देने के साथ समाज में उनके पुनर्समावेश की प्रक्रिया को भी मजबूत कर सकते हैं।
पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
हजारीबाग ओपन जेल में आयोजित यह विवाह समारोह केवल एक वैवाहिक आयोजन नहीं, बल्कि पुनर्वास की पहल के रूप में भी देखा जा रहा है। पुलिस और प्रशासन की सक्रिय भागीदारी से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों को सामान्य जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।
सुरेश सिंह मुंडा और सोमवारी हेमरम के विवाह के साथ दोनों ने अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत की। प्रशासन की इस पहल को पूर्व नक्सलियों के सामाजिक पुनर्वास और उन्हें समाज से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


