Chhapra News: बिहार के सारण जिले के छपरा में एक ऐसा मंदिर है, जहां धार्मिक आस्था के साथ आपसी विवादों को सुलझाने की अनूठी परंपरा भी जुड़ी हुई है। भगवान बाजार थाना क्षेत्र के रतनपुरा मोहल्ले में स्थित कोर्ट देवी मंदिर को स्थानीय लोग ‘कोर्ट वाली माई’ के नाम से जानते हैं। मान्यता है कि माता को साक्षी मानकर यहां विवादों के समाधान के लिए पंचायत बैठती है। मंदिर की एक खास पहचान यह भी है कि यहां महादलित समुदाय का परिवार पीढ़ियों से पूजा-अर्चना करता आ रहा है।
ढाई सौ साल पुराना माना जाता है मंदिर का इतिहास
स्थानीय लोगों के अनुसार, कोर्ट देवी मंदिर का इतिहास करीब 250 साल पुराना माना जाता है। मंदिर ट्रस्ट से जुड़े नागेंद्र पांडेय बताते हैं कि पहले यहां खुदाई के दौरान एक शिला मिली थी, जिस पर माता की प्रतिमा जैसी आकृति दिखाई दी। इसके बाद यहां पूजा-अर्चना शुरू हुई और धीरे-धीरे मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन गया।

स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, अंग्रेजों के शासनकाल में इस इलाके में अदालत लगती थी। इसी ऐतिहासिक जुड़ाव के कारण मंदिर को कोर्ट देवी के नाम से पहचान मिलने की बात कही जाती है।
माता को साक्षी मानकर होती है पंचायती
मंदिर की सबसे खास परंपरा यहां होने वाली पंचायत है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, जब दो पक्षों के बीच विवाद होता है और वे आपसी सहमति से समाधान चाहते हैं, तो मंदिर परिसर में बैठकर अपनी बात रखते हैं। माता को साक्षी मानकर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की जाती है।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि देवी के सामने झूठ नहीं बोलना चाहिए। इसी आस्था के कारण कई लोग पंचायत में हुए समझौते को स्वीकार करते हैं। हालांकि, यह सामाजिक परंपरा है, सरकारी न्यायालय की औपचारिक व्यवस्था नहीं।
महादलित परिवार की सातवीं पीढ़ी कर रही पूजा
कोर्ट देवी मंदिर की दूसरी विशेषता यहां की पुजारी परंपरा है। मुख्य पुजारी जीत मांझी के अनुसार, उनका परिवार सातवीं पीढ़ी से माता की पूजा-अर्चना करता आ रहा है। यह परंपरा मंदिर की धार्मिक विरासत के साथ सामाजिक समरसता का भी उदाहरण प्रस्तुत करती है।
पुराने कुएं और सात बहनों के मंदिर की भी मान्यता
मंदिर परिसर में एक पुराना कुआं भी है। स्थानीय मान्यता है कि इसके पानी से कुछ बीमारियों में लाभ मिलता है, हालांकि इसकी चिकित्सकीय पुष्टि नहीं है। परिसर में माता की सात बहनों के अलग-अलग मंदिर भी हैं, जहां श्रद्धालु पूजा करते हैं।
आस्था और सामाजिक परंपरा का अनूठा संगम
कोर्ट देवी मंदिर में दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां पूजा-अर्चना, पंचायत की परंपरा और पीढ़ियों से चली आ रही पुजारी व्यवस्था इसे विशिष्ट पहचान देती है। उचित संरक्षण और प्रचार-प्रसार से यह मंदिर धार्मिक पर्यटन के साथ बिहार की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।


