Bhagalpur News: जिले में दो साल पुराने चर्चित रेणु देवी हत्याकांड में अदालत ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्वितीय)-सह-विशेष न्यायालय (निगरानी) के न्यायाधीश दीपक कुमार की अदालत ने पत्नी की बेरहमी से हत्या करने के दोषी अरविंद पासवान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर दोषी को दो महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
शरीर से अलग मिला था सिर, पुलिस के सामने थी पहचान की चुनौती
मामले में अपर लोक अभियोजक (एपीपी) राजेश कुमार सिंह ने बताया कि रेणु देवी की दूसरी शादी अरविंद पासवान के साथ हुई थी। करीब दो साल पहले उनकी निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद जब पुलिस ने शव बरामद किया, तो मृतका के शरीर पर छह से सात जगह गहरे जख्म के निशान मिले थे। शव का सिर गायब था। इस वजह से मृतका की पहचान करना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया था।

पुलिस ने घटना के करीब सात से आठ दिन बाद एक नरमुंड बरामद किया। हालांकि, बिना सिर वाले धड़ और अलग से मिले नरमुंड के बीच संबंध स्थापित करना जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था। मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने वैज्ञानिक अनुसंधान का सहारा लिया।
मां के DNA सैंपल से हुई नरमुंड की पहचान
मृतका की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उसकी मां सीता देवी के रक्त के नमूने लेकर DNA जांच कराई गई। जांच के दौरान मां के DNA का नरमुंड से मिलान किया गया। रिपोर्ट में मिलान की पुष्टि होने के बाद स्पष्ट हुआ कि बरामद नरमुंड रेणु देवी का ही था। इस वैज्ञानिक साक्ष्य ने मामले की जांच को निर्णायक दिशा देने में अहम भूमिका निभाई।
अदालत के फैसले से परिवार को मिली राहत
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने अरविंद पासवान को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया। इस फैसले से मृतका के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद पूरी हुई है।
रेणु देवी की मां सीता देवी ने अदालत के फैसले पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी के साथ हुई दरिंदगी के बाद आज आए फैसले से उसकी आत्मा को शांति मिलेगी। उन्होंने पुलिस और अदालत के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें न्याय मिला है।
इस मामले में DNA जांच जैसे वैज्ञानिक साक्ष्य की भूमिका महत्वपूर्ण रही। अदालत के फैसले को रेणु देवी के परिवार के लिए न्याय की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।


