Vaishali News: जिले के राघोपुर प्रखंड स्थित रामपुर श्यामचंद गांव के समीप मंगलवार देर रात गंगा नदी में नाव पलटने से 13 बच्चों की मौत हो गई। हादसे में जान गंवाने वाले सभी बच्चे 15 वर्ष से कम उम्र के थे। मृतकों में सात बच्चे एक ही परिवार के थे। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा है। बुधवार सुबह प्रशासन ने सभी 13 बच्चों के शव उनके परिजनों को सौंप दिए।
भोज खाने जा रहे थे नाव सवार

स्थानीय लोगों के अनुसार, मंगलवार रात करीब 12 बजे छोटी नाव पर सवार 20 लोग पड़ोस के गांव में भोज खाने जा रहे थे। इसी दौरान गंगा नदी की बीच धारा में नाव असंतुलित होकर पलट गई। नाव पलटते ही सवार लोग गहरे पानी में गिरने लगे। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को बचाने की कोशिश शुरू की।
वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि दुर्घटना में 13 लोगों की मौत हुई है, जबकि सात लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। बचाए गए सभी लोगों को इलाज के लिए एनएमसीएच भेजा गया, जहां उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई गई।
तीन परिवारों के 13 बच्चों की गई जान
इस हादसे ने रामपुर श्यामचंद गांव के तीन परिवारों को गहरा आघात पहुंचाया है। मिली जानकारी के अनुसार, रामप्रवेश राय के परिवार के सात बच्चों, राजकिशोर राय के परिवार के पांच बच्चों और डोमन राय के घर की एक बच्ची की मौत हुई है। बच्चों की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिन घरों में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब मातम पसरा है।
सरकार ने दी आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने और राहत-बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवारों को चार-चार लाख रुपये के चेक दिए गए। इसके अलावा कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत तीन-तीन हजार रुपये की सहायता भी प्रदान की गई। आर्थिक सहायता मिलने के बाद परिजन बच्चों के शव लेकर घर लौटे और अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए।
तेजस्वी यादव ने जताया दुख
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी राघोपुर दियारा क्षेत्र में हुए नाव हादसे पर दुख जताया। उन्होंने स्थानीय लोगों और प्रशासन से राहत एवं बचाव कार्य तेज करने की अपील की। हादसे के बाद गांव में शोक का माहौल है। बच्चों को खोने वाले परिवारों के लिए यह दुख असहनीय है। सरकारी सहायता के बावजूद अपनों को खोने का दर्द परिजनों के चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा है।


