Giridih News: गिरिडीह में मौसम करवट लेने लगा है। मानसून की विदाई और शरद ऋतु के आगमन के बीच जिले के ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर से सटे खुले मैदानों तक प्रकृति का खूबसूरत रूप देखने को मिल रहा है। खेतों, नदी-नालों के किनारे और खाली जमीन पर खिले काश के सफेद फूल दूर से ऐसे नजर आ रहे हैं, जैसे धरती ने सफेद चादर ओढ़ ली हो। हवा के हल्के झोंकों के साथ लहराते काश के फूलों का दृश्य इन दिनों लोगों को खूब आकर्षित कर रहा है।
सुबह की हल्की धूप में चमकते काश के फूल और शाम की सुनहरी रोशनी में उनका नजारा लोगों को कुछ देर ठहरने के लिए मजबूर कर रहा है। ग्रामीण इलाकों में युवा, बच्चे और परिवार इन जगहों पर पहुंचकर तस्वीरें और वीडियो बनाते दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी काश के फूलों से सजे खेत और नदी किनारे के दृश्य लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।
काश खिला तो मानसून की विदाई का संकेत
गांवों में काश के फूलों को मौसम बदलने का प्राकृतिक संकेत माना जाता है। बुजुर्गों के बीच वर्षों से कहावत प्रचलित है- ‘काश फूले तो वर्षा बूढ़ी हो गई।’ माना जाता है कि काश खिलने के साथ बारिश का दौर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है और शरद ऋतु दस्तक देने लगती है।
लगातार उमस और बारिश के बाद अब सुबह-शाम मौसम सुहावना होने लगा है। हालांकि मौसम की वास्तविक स्थिति हर साल अलग होती है और इसके लिए वैज्ञानिक पूर्वानुमान अधिक विश्वसनीय है, लेकिन ग्रामीण समाज में प्रकृति के संकेतों को आज भी खास महत्व दिया जाता है।
दुर्गापूजा की भी याद दिलाता है काश
काश के फूलों का रिश्ता सिर्फ मौसम से नहीं, बल्कि त्योहारों से भी जुड़ा है। शारदीय नवरात्र और दुर्गापूजा के पहले काश का खिलना पूर्वी भारत में उत्सव के आगमन का प्रतीक माना जाता है। सफेद काश देखते ही लोगों को पूजा पंडाल, मेले, नए कपड़े और त्योहार की तैयारियां याद आने लगती हैं।
जैव विविधता के लिए भी उपयोगी
काश एक घास प्रजाति है, जिसका वैज्ञानिक नाम Saccharum spontaneum है। यह नदी किनारे और खुले क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगती है। इसकी जड़ें मिट्टी को बांधे रखने में मदद करती हैं और कई जगहों पर मिट्टी के कटाव को रोकने में भी सहायक होती हैं। इसके झुरमुट छोटे जीव-जंतुओं और पक्षियों को आश्रय देते हैं।
गिरिडीह में काश की यह सफेद बहार प्रकृति का ऐसा संदेश है, जो मानसून की विदाई के साथ शरद ऋतु और त्योहारों के मौसम के आगमन की आहट सुना रही है।
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