NEET पेपर लीक आंदोलन के बाद संगठन पर राजनीतिक दल से नजदीकी का आरोप, ब्रह्मभट्ट ने CJपी-डेमोक्रेटिक बनाने का किया ऐलान
New Delhi: राजनीति से दूर रहने का दावा करने वाली ‘कॉकॉरच जनता पार्टी’ (CJP) में स्थापना के महज चार महीने बाद ही अंदरूनी विवाद सामने आ गया है। पार्टी के प्रमुख सदस्यों में शामिल मनीष ब्रह्मभट्ट ने अभिजीत दीपके से अलग होने की घोषणा करते हुए एक नए गुट कॉकॉरच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक (CJP-D) के गठन का ऐलान किया है। मई में गठित हुई पार्टी सितंबर आते-आते आंतरिक कलह के कारण दो धड़ों में बंटती नजर आ रही है।
मनीष ब्रह्मभट्ट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर CJP से अलग होने की घोषणा की और अभिजीत दीपके पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि NEET पेपर लीक आंदोलन की सफलता के बाद जमीनी कार्यकर्ताओं और छात्रों के हितों को नजरअंदाज किया गया और संगठन एक खास राजनीतिक दल के करीब पहुंच गया।
राष्ट्रीय टीम के गठन पर उठाए सवाल
ब्रह्मभट्ट के अनुसार आंदोलन के बाद बनाई गई 12 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम के गठन में जमीनी कार्यकर्ताओं, छात्रों और सोशल मीडिया वॉलंटियर्स से कोई सलाह नहीं ली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय टीम के 12 सदस्यों में से आठ का संबंध एक अन्य राजनीतिक दल से है।
उनका कहना है कि इससे संगठन की निष्पक्षता और उसके राजनीतिक रूप से स्वतंत्र होने को लेकर सवाल खड़े होते हैं। ब्रह्मभट्ट ने दावा किया कि आंदोलन में अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े युवाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई थी, लेकिन नई राष्ट्रीय टीम में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
उन्होंने महिला, सिख और मुस्लिम समुदायों से जुड़े चेहरों को भी प्रतिनिधित्व नहीं दिए जाने का आरोप लगाया।
‘मेरिट के नाम पर शुरू हुआ आंदोलन, अब मेरिट ही हाशिये पर’
ब्रह्मभट्ट ने संगठन के मौजूदा नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस आंदोलन की नींव मेरिट और पेपर लीक के खिलाफ पड़ी थी, उसी आंदोलन के नेतृत्व में अब मेरिट और प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता नहीं मिल रही है।
उन्होंने कहा कि CJP-D को एक लोकतांत्रिक और राष्ट्रव्यापी संगठन के रूप में खड़ा किया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक राज्य के स्थानीय आंदोलनकारियों और वॉलंटियर्स में से पांच-पांच प्रतिनिधियों का चयन करने की बात कही गई है। उनका दावा है कि इससे संगठन में हर क्षेत्र और वर्ग की आवाज को प्रतिनिधित्व मिल सकेगा।
अभिजीत दीपके ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, अभिजीत दीपके ने मनीष ब्रह्मभट्ट के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने विशेष रूप से किसी राजनीतिक दल से सांठगांठ के आरोपों को गलत बताया।
दीपके ने कहा कि उनकी पार्टी छात्रों की ‘ए टीम’ है और उसका किसी अन्य राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग CJP को एक विशेष दल की बी टीम बताते हैं, जबकि कुछ लोग इसे किसी दूसरे दल की बी टीम बताते हैं। उनके अनुसार, संगठन की ओर से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है।
स्थापना के चार महीने बाद ही बढ़ी चुनौती
CJP की स्थापना के कुछ ही महीनों बाद सामने आया यह विवाद संगठन के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। एक तरफ ब्रह्मभट्ट ने अलग गुट बनाकर संगठन में व्यापक प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बात कही है, वहीं दीपके ने पार्टी पर लगाए गए राजनीतिक संबंधों के आरोपों को खारिज कर दिया है।
अब देखना होगा कि दोनों धड़ों के बीच विवाद आगे किस दिशा में जाता है और NEET पेपर लीक आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं और समर्थकों का रुख किस ओर होता है।


