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          एक शिक्षक, 34 बच्चे और उफनती नदी… ब्रह्मदेव के जज्बे को शिक्षक दिवस पर सलाम

          ब्रह्मदेव शर्मा पिछले 19 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सपहा गांव जरगा पंचायत के अंतर्गत जंगल के बीच स्थित है और गांव के बच्चों की पढ़ाई के लिए यही विद्यालय है। वर्तमान में स्कूल में कक्षा एक से पांच तक कुल 34 बच्चे नामांकित हैं। पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी फिलहाल अकेले शिक्षक ब्रह्मदेव शर्मा के कंधों पर है।
          टुडे पोस्ट लाइवBy टुडे पोस्ट लाइवSeptember 4, 2026Updated:September 4, 2026No Comments4 Mins Read
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          कोडरमा के सपहा स्कूल में अकेले शिक्षक हैं ब्रह्मदेव, 34 बच्चों की जिम्मेदारी; बरसात में 4-5 फीट पानी पार कर पहुंचाते हैं शिक्षा

          Koderma News:  शिक्षक दिवस पर 5 सितंबर को राज्य स्तर पर सम्मानित होने वाले शिक्षकों में कोडरमा जिले से एकमात्र नाम ब्रह्मदेव कुमार शर्मा का है। झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, रांची की ओर से शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए उनका चयन राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान के लिए किया गया है। वे कोडरमा प्रखंड के सुदूरवर्ती सपहा गांव स्थित अपग्रेड प्राइमरी स्कूल में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत हैं।

          ब्रह्मदेव शर्मा पिछले 19 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सपहा गांव जरगा पंचायत के अंतर्गत जंगल के बीच स्थित है और गांव के बच्चों की पढ़ाई के लिए यही विद्यालय है। वर्तमान में स्कूल में कक्षा एक से पांच तक कुल 34 बच्चे नामांकित हैं। पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी फिलहाल अकेले शिक्षक ब्रह्मदेव शर्मा के कंधों पर है।

          https://todaypostlive.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Video-2026-09-04-at-15.05.23.mp4

          बरसात में उफनती नदी बन जाती है सबसे बड़ी चुनौती

          सपहा स्कूल तक पहुंचना सामान्य दिनों में भी आसान नहीं है, लेकिन बरसात के मौसम में ब्रह्मदेव शर्मा के सामने सबसे बड़ी चुनौती नदी को पार करना होती है। बारिश के दौरान करीब तीन महीने तक नदी का जलस्तर काफी बढ़ा रहता है। कई बार नदी में चार से पांच फीट तक पानी और तेज बहाव रहता है।

          इसके बावजूद ब्रह्मदेव शर्मा स्कूल जाना नहीं छोड़ते। वह नदी के एक किनारे अपनी मोटरसाइकिल खड़ी करते हैं और फिर नदी पार कर विद्यालय पहुंचते हैं। जब पानी अधिक होता है तो उन्हें कपड़े बदलकर नदी पार करनी पड़ती है। इसके लिए वह अपने साथ हाफ पैंट रखते हैं। नदी पार करने के बाद दोबारा ड्रेस पहनकर स्कूल पहुंचते हैं और बच्चों को पढ़ाना शुरू कर देते हैं।

          https://todaypostlive.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Video-2026-09-04-at-17.08.57.mp4

          पानी बढ़ा तो स्कूल में ही गुजारनी पड़ती है रात

          कई बार नदी का जलस्तर इतना बढ़ जाता है कि शाम को वापस घर लौटना संभव नहीं होता। ऐसी स्थिति में ब्रह्मदेव शर्मा को विद्यालय परिसर में ही रात गुजारनी पड़ती है। उन्होंने स्कूल में अपने लिए कपड़ों का एक अतिरिक्त सेट भी रखा है।

          जब नदी का पानी खतरनाक स्तर पर होता है और वह घर नहीं लौट पाते, तो स्थानीय ग्रामीण उनके भोजन की व्यवस्था करते हैं। ग्रामीणों की यह मदद भी शिक्षक और गांव के बीच बने मजबूत संबंध को दिखाती है।

          ‘बारिश को बहाना बना दूं तो बच्चों का भविष्य क्या होगा’

          ब्रह्मदेव शर्मा कहते हैं कि उनका विद्यालय एक शिक्षकीय विद्यालय है। अगर वह नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंचेंगे और बारिश को बहाना बना देंगे, तो बच्चों का भविष्य क्या होगा। यही चिंता उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी विद्यालय पहुंचने की प्रेरणा देती है।

          उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में बायोमेट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था है। जिस दिन उपस्थिति दर्ज नहीं होगी, उस दिन का वेतन कट सकता है। लेकिन उनके लिए बच्चों की पढ़ाई और उनका भविष्य सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

          पुल बनने से हजारों ग्रामीणों को मिलेगी राहत

          ब्रह्मदेव शर्मा के अनुसार सपहा और आसपास के ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान नदी पर पुल का निर्माण है। यदि जिला प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए नदी पर पुल का निर्माण कराए, तो शिक्षक और स्कूली बच्चों के साथ-साथ क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी।

          शिक्षक दिवस पर सम्मान, जज्बे को सलाम

          राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान के लिए ब्रह्मदेव शर्मा का चयन ऐसे समय हुआ है, जब उनकी कहानी शिक्षक के समर्पण की मिसाल बनकर सामने आई है। एक ओर जहां बारिश और उफनती नदी उनके लिए रोज चुनौती बनती है, वहीं दूसरी ओर बच्चों का भविष्य उन्हें हर दिन स्कूल पहुंचने की ताकत देता है।

          ब्रह्मदेव शर्मा की कहानी बताती है कि एक सच्चा शिक्षक सिर्फ कक्षा में नहीं पढ़ाता, बल्कि अपने संघर्ष और समर्पण से भी विद्यार्थियों को जीवन का पाठ पढ़ाता है।

          Brahmdev Sharma Jharkhand Teacher Award Koderma Teacher Award Sapha School Koderma Teachers Day 2026 कोडरमा शिक्षक सम्मान झारखंड शिक्षक सम्मान ब्रह्मदेव शर्मा शिक्षक दिवस 2026 सपहा स्कूल
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