आपातकाल की वर्षगांठ पर लोकनायक जयप्रकाश नारायण को नड्डा की श्रद्धांजलि, लोकतंत्र की रक्षा के संदेश को बताया आज भी प्रासंगिक
Bihar News: आपातकाल की वर्षगांठ के अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने पटना में लोकनायक जयप्रकाश नारायण को श्रद्धांजलि अर्पित की। गुरुवार को उन्होंने कदमकुआं स्थित महिला चरखा समिति परिसर पहुंचकर लोकनायक की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उनके लोकतांत्रिक संघर्षों को स्मरण किया।
इस दौरान नड्डा ने महिला चरखा समिति परिसर में स्थित जयप्रकाश नारायण के ऐतिहासिक आवास का भी भ्रमण किया। उन्होंने वहां आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिसमें लोकनायक के जीवन, उनके विचारों, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण तथा आपातकाल के विरोध में चलाए गए आंदोलन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदर्शित की गई थीं।
मौके पर नड्डा ने कहा कि जयप्रकाश नारायण भारतीय लोकतंत्र के ऐसे महानायक थे, जिन्होंने तानाशाही प्रवृत्तियों और सत्ता के दमन के खिलाफ देश को एकजुट करने का ऐतिहासिक कार्य किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए जेपी द्वारा किया गया संघर्ष भारतीय इतिहास में सदैव याद रखा जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय था। उस समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया, विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया गया और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाया गया। ऐसे चुनौतीपूर्ण दौर में जयप्रकाश नारायण ने लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना की रक्षा के लिए जो संघर्ष किया, वह आज भी प्रेरणा का स्रोत है।
प्रदर्शनी के अवलोकन के बाद नड्डा ने कहा कि लोकनायक केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि वे नैतिक राजनीति, जनभागीदारी और वैचारिक प्रतिबद्धता के प्रतीक थे। उनके आदर्श और विचार आज भी देश को लोकतांत्रिक मूल्यों की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग दिखाते हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा जयप्रकाश नारायण के विचारों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनके योगदान का सम्मान करती रही है। आपातकाल की वर्षगांठ केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं और जनता की आवाज के सम्मान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का भी अवसर है।
नड्डा ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती नागरिकों की जागरूकता, स्वतंत्र संस्थाओं और जनमत के सम्मान पर निर्भर करती है। ऐसे में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आदर्शों को अपनाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है।


