Bagaha News: बिहार में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वाल्मीकिनगर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने मतदान नहीं करने के अपने फैसले पर सफाई दी है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) द्वारा घोषित उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह सामाजिक संतुलन के मानकों पर खरे नहीं उतरते थे।
सुरेंद्र कुशवाहा ने स्पष्ट कहा कि आरजेडी का उम्मीदवार न तो पिछड़ा वर्ग, न अत्यंत पिछड़ा, न दलित और न ही अल्पसंख्यक समाज से आता है। उन्होंने कहा कि महागठबंधन की राजनीति सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के आधार पर चलती है, लेकिन इस बार इन सिद्धांतों की अनदेखी की गई। उनके अनुसार, जिन लोगों ने विधानसभा चुनाव में उन्हें समर्थन नहीं दिया, उन्हें वोट देना उनकी अंतरात्मा को स्वीकार नहीं था।
उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी पिछड़े, दलित या अल्पसंख्यक वर्ग से उम्मीदवार बनाया जाता, तो वे निश्चित रूप से समर्थन करते। उन्होंने सुझाव दिया कि आरजेडी को दीपक यादव, हिना खान या मुकेश सहनी जैसे नेताओं में से किसी को उम्मीदवार बनाना चाहिए था।
कांग्रेस विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव से पहले गठबंधन के भीतर कोई समुचित बैठक नहीं हुई। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के साथ भी कोई चर्चा नहीं की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया गया। इसी कारण पार्टी ने विधायकों को अपने विवेक से निर्णय लेने की छूट दी थी।
गौरतलब है कि 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के तीन और आरजेडी के एक विधायक ने मतदान नहीं किया। इसका सीधा फायदा एनडीए को मिला और उसने सभी पांचों सीटों पर जीत दर्ज की। इस घटना के बाद महागठबंधन में आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

