Ranchi News:- मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन एक बार फिर प्रवासी कामगारों के मसीहा साबित हुए हैं। उनकी संवेदनशीलता और त्वरित पहल के कारण अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया में फंसे झारखंड के 48 प्रवासी कामगारों की सुरक्षित वापसी संभव हो पाई है। ये सभी कामगार बीते तीन महीनों से वेतन न मिलने और आर्थिक संकट से जूझ रहे थे
जैसे ही मुख्यमंत्री को इन कामगारों की परेशानी की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत श्रम, रोजगार, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के अधीन राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष को सक्रिय करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद विभाग ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए भारतीय दूतावास और संबंधित एजेंसियों के सहयोग से पूरी प्रक्रिया पूरी की।
इनमें हजारीबाग के 19, गिरिडीह के 14 और बोकारो के 15 कामगार शामिल थे, जो पीसीएल प्रेम पावर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड में कार्यरत थे। श्रम विभाग के अधिकारियों ने कामगारों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को विस्तार से जाना। अब राज्य सरकार इन कामगारों और उनके परिवारों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने हमेशा यह सिद्ध किया है कि झारखंड का हर श्रमिक, चाहे वह देश में हो या विदेश में, सरकार की जिम्मेदारी है। ट्यूनीशिया में फंसे कामगारों की वापसी इस सोच और प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण है।
यह सफलता न केवल झारखंड सरकार की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई का प्रमाण है, बल्कि प्रवासी कामगारों के प्रति राज्य सरकार के मानवीय दृष्टिकोण को भी दर्शाती है। मुख्यमंत्री के प्रयासों से एक बार फिर यह संदेश गया है कि झारखंड सरकार अपने नागरिकों के साथ हर परिस्थिति में खड़ी है।

