Dhanbad News:- झारखंड के धनबाद जिले में स्थित 252 वर्ष पुराने तेलीपाड़ा काली मंदिर की अपनी अनोखी परंपरा और ऐतिहासिक महत्ता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि इसकी स्थापना की कहानी भी बेहद रोचक है। कहा जाता है कि लगभग ढाई सौ साल पहले तेलीपाड़ा के निवासी मगन महतो को स्वप्न में मां काली ने दर्शन दिए और यहां मंदिर स्थापित करने का आदेश दिया। स्वप्न के निर्देशानुसार मगन महतो ने मां काली की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना आरंभ की।
चार वर्ष बाद यहां एक छोटा-सा मंदिर बनाया गया, जो समय के साथ श्रद्धा और भक्ति का बड़ा केंद्र बन गया। वर्ष 1987 में भक्तों के सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार कर एक भव्य रूप दिया गया। तभी से हर वर्ष काली पूजा के अवसर पर यहां विशेष आयोजन किया जाता है।
काली पूजा के दिन, जो अमावस्या पर होती है, यहां हजारों श्रद्धालु एकत्रित होकर मां काली के दर्शन करते हैं। इस दौरान विशेष पूजा पंडाल बनाया जाता है और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सैकड़ों बकरों की बलि दी जाती है। साथ ही, भक्तों के लिए पूजा समिति की ओर से खिचड़ी और खीर का प्रसाद वितरण किया जाता है।
माना जाता है कि इस मंदिर में मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है, इसलिए दूर-दराज के भक्त भी यहां अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं। इस बार काली पूजा के मौके पर पूजा समिति ने ‘शमशान घाट’ थीम पर पंडाल तैयार किया है, जिसमें भूत-प्रेत और तांत्रिक माहौल का दृश्य दर्शाया गया है। समिति के सचिव संतोष साव ने बताया कि यह थीम भक्तों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
तेलीपाड़ा काली मंदिर न केवल श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि यह धनबाद की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी प्रसिद्ध है, जहां हर साल भक्ति और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिलता है।
