Chaibasa News:- झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने इंसानियत को शर्मसार भी किया और फिर उसी धरती पर इंसानियत की मिसाल भी पेश की। गोइलकेरा प्रखंड क्षेत्र के गर्ल्स स्कूल के पीछे मछुआ टोली के पास शनिवार की सुबह झाड़ियों के नीचे एक नवजात शिशु रोता-बिलखता मिला।
स्थानीय लोगों ने बताया कि किसी निर्दयी मां ने अपने ही मासूम को बरगद के पेड़ के नीचे फेंक दिया था। सुबह जब लोगों ने बच्चे की करुण पुकार सुनी तो वे मौके पर पहुंचे। वहां झाड़ियों में कपड़ों में लिपटा नवजात दिखा। लोगों ने तत्काल बच्चे को बाहर निकाला और उसकी देखभाल शुरू की।
इसी दौरान मोहल्ले के निवासी रमेश भुइयां और उनकी पत्नी सुजाता भुइयां ने आगे बढ़कर इंसानियत का उदाहरण पेश किया। उन्होंने बिना किसी झिझक के उस मासूम को गोद में उठा लिया और कहा कि “अब यह बच्चा हमारा है, हम ही इसके माता-पिता हैं।” दोनों ने बच्चे के पालन-पोषण की जिम्मेदारी लेने का फैसला किया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चे को संभवतः शुक्रवार देर रात झाड़ियों में छोड़ दिया गया था। बच्चे के मिलने के बाद ग्रामीणों ने घटना की सूचना स्थानीय प्रशासन और पुलिस को दी। फिलहाल शिशु सुरक्षित है और रमेश भुइयां का परिवार उसकी पूरी देखभाल कर रहा है।
पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और नवजात को फेंकने वाली महिला की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। इस घटना ने जहां एक ओर समाज के कड़वे सच को उजागर किया है, वहीं रमेश और सुजाता भुइयां जैसे दंपती ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत अभी जिंदा है।

