सुलतानपुर: पुलिस पदक विजेता ने सुनाई आपातकाल की दास्तान, जबरन नसबंदी के डर से वर्दी में घूमते थे पुलिसकर्मी भी
आपातकाल में मंडप से दूल्हे उठाकर कराई जाती थी नसबंदी
Sultanpur News:- “मैं उस भयावह दौर को कभी नहीं भूल सकता,”—ये शब्द हैं सुलतानपुर निवासी और दो बार राष्ट्रपति से पुलिस सेवा पदक प्राप्त कर चुके हरिनारायण राय के, जिन्होंने आपातकाल की 50वीं बरसी पर टुडे पोस्ट लाइव रिपोर्टर से अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने बताया कि वर्ष 1975 में लगे आपातकाल के दौरान शासन और प्रशासन पर इस कदर दबाव था कि नसबंदी लक्ष्य पूरा करने के लिए अधिकारियों को जबरदस्ती कदम उठाने पड़ते थे। “उस दौर में गांवों से लोगों को जबरन उठा लिया जाता था। यहां तक कि शादी के मंडप से भी दूल्हों को ले जाकर उनकी नसबंदी कर दी जाती थी।”
हरिनारायण राय स्वयं पुलिस सेवा में थे, फिर भी उन्हें डर लगा रहता था कि कहीं उन्हें भी जबरदस्ती पकड़ न लिया जाए। “मैं जब भी छुट्टी पर घर आता था, वर्दी पहनकर ही बाहर निकलता था ताकि कोई मुझे आम नागरिक समझकर न पकड़ ले,” उन्होंने कहा।
उन्होंने बताया कि उनके बड़े भाई गिरजा शंकर राय, जो एक इंटर कॉलेज में प्रवक्ता थे, की भी जबरन नसबंदी कर दी गई थी। “इसके बावजूद बाद में उनके दो बच्चे हुए, जिससे परिवार में काफी हंगामा भी हुआ।”
राय ने बताया कि गांवों में लोग जंगलों, बाग-बगीचों, यहां तक कि नदियों के किनारे भूखे-प्यासे छिपकर दिन गुजारते थे। रात में ही वे चुपचाप घर लौटते थे। उस दौर में कोई संचार सुविधा नहीं थी, जिससे लोग अपनों का हाल तक नहीं जान पाते थे।
“इतना आतंक मैंने जीवन में पहले कभी नहीं देखा और शायद कभी देखूंगा भी नहीं,” उन्होंने कहा।
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