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    Home»Headline»मुख्यमंत्री हेमंत साेरेन ने प्रधानमंत्री से सुखाड़ को देखते हुए झारखंड राज्य के लिए विशेष पैकेज की मांग रखी
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    मुख्यमंत्री हेमंत साेरेन ने प्रधानमंत्री से सुखाड़ को देखते हुए झारखंड राज्य के लिए विशेष पैकेज की मांग रखी

    टुडे पोस्ट लाइवBy टुडे पोस्ट लाइवAugust 7, 2022No Comments5 Mins Read
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    रांची।  नीति आयोग की रविवार को हुई बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन  ने शामिल होकर केंद्र सरकार से जीएसटी के चलते झारखंड को हो रहे नुकसान की चिंता से अवगत कराया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से झारखंड के हितो की रक्षा के लिए मदद की गुहार लगाई है। इसके साथ ही इस दिशा में सकारात्मक पहल करने का आग्रह प्रधानमंत्री से की। मालूम हो कि नई दिल्ली में रविवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में नीति आयोग की बैठक हुई।

    सिंचाई की सुविधा के लिए विशेष पैकेज स्वीकृत किया जाए

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सिंचाई सुविधाओं की कमी के कारण हर तीन-चार साल पर राज्य को सुखाड़ का दंश झेलना पड़ता है। इस वर्ष भी अभी तक सामान्य से 50 प्रतिशत कम वर्षा हुई है एवं 20 प्रतिशत से भी कम जमीन पर धान की रोपनी हो पाई है। वर्तमान परिस्थिति में झारखंड सुखाड़ की ओर बढ़ रहा है। सोरेन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि झारखंड राज्य के लिए विशेष पैकेज स्वीकृत किया जाए, जिससे कि सुखाड़ से निबटा जा सके।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत दो वर्षों से कोरोना जैसी महामारी के फलस्वरूप झारखंड जैसे पिछड़े राज्य के आर्थिक एवं सामाजिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इस कुप्रभाव को न्यूनतम करने के लिए राज्य सरकार अथक प्रयास कर रही है और बेहतर परिणाम भी मिल रहे हैं। विगत ढाई वर्षों में झारखंड ने आर्थिक, सामाजिक विकास एवं सामाजिक न्याय के क्षेत्र में विभिन्न कदम उठाे हैं। प्रदेश की मूलभूत संरचना को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस आयाम को और अधिक बल देने के लिए केन्द्र सरकार का सहयोग सभी राज्यों, विशेष कर झारखंड जैसे पिछड़े एवं आदिवासी बाहुल्य राज्य को प्राप्त हो।

    केसीसी के लिए बैंकों को निर्देश दे नीति आयोग

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 2019 तक 38 लाख किसानों में से मात्र 13 लाख किसानों को केसीसी मिल पाया था। पिछले दो सालों में सरकार के अथक प्रयास से पांच लाख नए किसानों को केसीसी का लाभ प्राप्त हुआ है लेकिन अभी भी 10 लाख से अधिक आवेदन विभिन्न बैंकों में लंबित हैं। राज्य सरकार नीति आयोग से सभी बैंकों को केसीसी की स्वीकृति के लिए आवश्यक निर्देश देने का आग्रह करती है। झारखंड में फसलों में विविधता लाने की दिशा में अभी तक कोई विशेष कार्य योजना पर कार्य नहीं हुआ है। कारण किसानों का सब्सिस्टेंस खेती पर केंद्रित होना। हमने धान अधिप्राप्ति को दो वर्ष में चार से आठ लाख टन तक पहुंचाया है लेकिन अभी भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए केंद्र सरकार और एफसीआई के विशेष सहयोग की आवश्यकता है।

    शिक्षा के नये द्वार खोलने का हो रहा प्रयास

    मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड एक आदिवासी बाहुल्य राज्य है तथा आदिवासियों के लिए उच्च शिक्षा के नये द्वार खोलने के लिए पहला पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की स्वीकृति झारखंड विधानसभा द्वारा प्रदान कर दी गयी है। इसके अतिरिक्त राज्य में कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना भी प्रक्रियाधीन है जो राज्य में व्यवसायिक उच्च शिक्षा के नए आयाम लिखेगा। राज्य में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए छात्रों को कम ब्याज दर पर ऋण प्रदान करने के लिए शीघ्र ही गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना लागू की जायेगी। इससे दो से तीन लाख छात्रों को फायदा होगा।

    उत्खनन से प्राप्त आय का अधिक हिस्सा झारखंड को प्राप्त होना चाहिए

    मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड का गठन ही जल जंगल और जमीन की रक्षा के लिए हुआ है लेकिन यहां जितनी भी कंपनियां खनन एवं उद्योग लगाने आईं उन सभी ने बस यहां जल, जंगल और जमीन का दोहन किया है। किसी भी खनन कंपनी द्वारा माईनिंग करके जमीन को रिक्लेम करने का प्रयास नहीं हुआ है। कभी भी विस्थापितों की समस्या को दूर करने का सही से प्रयास नहीं हुआ।

    झारखंड के खनिज एवं वन संपदाओं का देश के विकास में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा है परन्तु झारखण्ड के आदिवासी और मूलवासी ने हमेशा अपने को ठगा हुआ महसूस किया। मुझे लगता है कि खनिज संपदा के उत्खनन से प्राप्त आय का अधिकाधिक हिस्सा झारखंड जैसे राज्य को प्राप्त होना चाहिए परन्तु पिछले कुछ वर्षों में जो नीतिगत परिवर्तन हुए हैं वो ठीक इसके विपरीत साबित हुए हैं। उदाहरण के लिए जीएसटी लागू होने से झारखंड को काफी घाटा हुआ है लेकिन उसकी भरपाई करने का प्रयास समुचित तरीके से नहीं किया गया है।

    सोरेन ने कहा कि झारखंड राज्य में विभिन्न खनन कंपनियों की भू अर्जन, रॉयल्टी इत्यादि मद में करीब एक लाख छत्तीस हज़ार करोड़ रुपये बकाया है लेकिन खनन कंपनियों इसके भुगतान में कोई रुचि नहीं दिखा रही है। हम लोगों ने विभिन्न बैठकों में इस विषय को उठाया है तथा इस संबंध में पत्राचार भी किया है लेकिन हमारे सभी प्रयासों का फलाफल अभी तक शून्य रहा है। झारखंड को ये बकाया राशि का भुगतान कराने का निर्देश इन खनन कंपनियों को केंद्र सरकार दे, जिससे कि राज्य के लोगों के सर्वांगीण विकास में इस राशि का उपयोग किया जा सके।

    आदिवासी एवं पिछड़े वर्ग के हितों का रखें ध्यान

    मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड का करीब 30 प्रतिशत एरिया वन भूमि से आच्छादित है एवं अधिकांश खनिज संपदा वन क्षेत्र में अवस्थित है, जिसके लिए वन भूमि अपयोजन की आवश्यकता होती है। अभी हाल के दिनों में वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के अन्तर्गत नई नियमावली बनाई गई है जिसमें वन भूमि अपयोजन के लिए स्टेज दो क्लीयरेंस के पूर्व ग्राम सभा की सहमति के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है जो मेरे विचार से आदिवासी एवं पिछड़े वर्ग के हितों के प्रतिकूल है।

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