नवरात्र में विशेष आस्था का केंद्र बना मां दिउड़ी धाम
Ranchi News: जिले के तमाड़ प्रखंड में स्थित प्राचीन मां दिउड़ी मंदिर श्रद्धा और परंपरा का अद्भुत संगम माना जाता है। यहां रोजाना हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन नवरात्र के दिनों में इस मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है। करीब 200 वर्षों से यहां बलि की परंपरा निरंतर जारी है। विशेषकर महानवमी के दिन भक्त अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए बकरों और भैंसों की बलि देते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस परंपरा के साथ की गई पूजा मां को प्रसन्न करती है और उनकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। यही कारण है कि भारत के मशहूर क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी समेत कई बड़े नाम इस मंदिर में अपनी आस्था व्यक्त कर चुके हैं।
मुख्य पुजारी पंडित मनोज पांडा और नरसिंह पांडा के अनुसार, यह मंदिर असुर सभ्यता का अनोखा उदाहरण है। कहा जाता है कि इसका निर्माण 10वीं शताब्दी में असुरों ने किया था, जबकि तमाड़ राज परिवार ने यहां विधिवत पूजा-अर्चना की शुरुआत करवाई। तभी से यहां की परंपरा अनवरत चल रही है।
मंदिर में स्थापित देवी 16 भुजाओं वाली शेरावाली माता के रूप में विराजमान हैं। मां के हाथों में शंख, चक्र, गदा, त्रिशूल, तीर, पुष्प और महिषासुर का सिर है। मान्यता है कि मां की जटाओं में देवी काली का वास है। इस मंदिर की सबसे विशेष बात यह है कि यहां पूजा ब्राह्मण और गांव के पाहन दोनों मिलकर करते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में यहां एक गाय प्रतिदिन अपने आप दूध अर्पित करती थी। जब यह रहस्य राजा तक पहुंचा तो जंगल की सफाई कर मंदिर का निर्माण कराया गया। तब से यह स्थान आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर भक्तों की भीड़, जयकारों और मंत्रोच्चारण से गूंज उठता है। मां दिउड़ी आज भी श्रद्धा, परंपरा और आस्था का जीवंत प्रतीक बनी हुई हैं।

